पराली दो खाद लो के तहत किसान उठा सकते हैं योजना का लाभ

सत्यम शर्मा
बरेली

पराली दो खाद लो के तहत किसान उठा सकते हैं योजना का लाभ

बरेली, 11 अक्टूबर। संयुक्त कृषि निदेशक डॉ0 राजेश कुमार ने बताया कि खरीफ अभियान-2023 लगभग समाप्ति की ओर है, जिसमें धान की फसल पकने को तैयार हो रही है, धान की फसल पकने के उपरान्त किसान भाईयों द्वारा फसल अवशेषों को प्रायः खेत में ही जला देते है, जिससे पर्यावरण एवं भूमि की भौतिक, रासायनिक एवं जैविक दशा खराब (नुकसान) होती है। फसल प्रबंधन हेतु शासन द्वारा किसानों को प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन फॉर इन-सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्राप रेजीड्यू योजना के अन्तर्गत व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जा रहा है, जिसमें किसानों की जनपद स्तर, न्याय पंचायत स्तर पर किसान गोष्ठियों का आयोजन तथा मण्डल, जनपद, विकास खण्ड, तहसील कार्यालयों एवं कृषि मण्डियों पर स्थाई होर्डिंग लगाये गये हैं। इसी सम्बन्ध में रेड़ियों/पेपर, बाल पेंटिग एवं अन्य माध्यमों से भी फसल जलाये जाने पर होने वाले दुष्परिणामों के बारे में अवगत कराया जा रहा है। किसानों को जागरूक करने हेतु भारत सरकार द्वारा फसल अवशेष प्रबन्ध में प्रयुक्त होने वाले नवीन कृषि यंत्रों जैसे फार्म मशीनरी बैक संस्थानों (एफ0पी0ओ0) को दिये जाने पर 80 प्रतिशत तथा प्रत्येक कृषि यंत्रों जैसे कम्वाइन हार्बेस्टर, हैपी सीडर, पैडी स्ट्राचापर, रोटरी स्लैशर, सीड ड्रिल इत्यादि कृषि यंत्र पर 50 प्रतिशत अनुदान भी देय है।
संयुक्त कृषि निदेशक ने किसान भाइयों से अनुरोध किया है कि फसल अवशेष को न जलाये बल्कि वेलिंग मशीन द्वारा वेल्स बनाकर इनको एच0पी0सी0एल0 बायोगैस प्लान्ट दातागंज-बदायूॅ, बायोएर्न्जी प्लान्ट फरीदपुर में भेजकर अतिरिक्त आर्थिक लाभ भी कमा सकते हैं। साथ ही गौशालाओं में आपूर्ति कर पराली दो खाद लो के तहत किसान उक्त योजना का लाभ उठा सकते हैं। किसान भाई पूसा बायो डी-कम्पोजर/यूरिया का छिड़काव कर पराली का इन-सीटू प्रबन्धन कर खेत में जीवांश की मात्रा बढ़ा सकते हैं साथ ही पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते हैं। किसान भाई किसी भी दशा में फसल अवशेषों को न जलायें, यदि जलाते हैं तो मा0 राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण, नई दिल्ली के आदेश के अनुसार फसल अवशेष जलाना दण्ड़नीय अपराध है, जो कि निम्नवत् है- दो एकड़ से कम भूमि वाले कृषकों के लिए रू0 2,500 प्रति घटना, दो एकड़ से पॉच एकड़ भूमि रखने वाले लघु कृषकों के लिए रू0 5,000 प्रति घटना व पॉच एकड़ से अधिक भूमि रखने वाले बड़े कृषकों के लिए रू0 15,000 प्रति घटना है।।

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