उपमुख्यमंत्री के सामने ही शर्मशार हो गया एटा का प्रशासन और सूचना विभाग

उपमुख्यमंत्री के सामने ही शर्मशार हो गया एटा का प्रशासन और सूचना विभाग
-सोशल मीडिया ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और पत्रकारों के बीच बनाई मानव दीवार
-अखबारों के पत्रकार नहीं कर सके उपमुख्यमंत्री से प्रेसवार्ता, बाइट के नाम पर खड़े रहे सोशल मीडियाकर्मी
-सूचना विभाग यू-टयूबरों से दिखा परेशान, एडीआईओ ऐसी स्थिति फिर न आये, ढूंढ रहे हैं समाधान


एटा। जनपद में पत्रकारिता के गिरते स्तर ने गत दिवस उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के जनपद भ्रमण कार्यक्र के दौरान आयोजित प्रेसवार्ता में सोशल मीडिया में कार्यरत बहुत बड़े जनसमूह ने एटा जनपद में पत्रकारिता के नाम पर हो रही अराजकता को जगजाहिर कर अखबारों के पत्रकारों के साथ-साथ, जिलाधिकारी, सूचना विभाग के अपर जिला सूचना अधिकारी को शर्मशार कर दिया। सोशल मीडिया की अनियंत्रित भीड़ से उपमुख्यमंत्री तक असहज हो गये। प्रेसवार्ता में जब तक उपमुख्यमंत्री बोलते रहे तब तक बाइट के नाम पर सोशल मीडियाकर्मी उपमुख्यमंत्री और पत्रकारों के बीच अपनी-अपनी माइक आईडी पकड़े मानव दीवार बनाकर खड़े रहे। यह स्थिति लगभग आधे घंटे तक बनी रही। समाचार पत्रों के प्रतिनिधि उपमुख्यमंत्री से कोई सवाल जवाब तक नहीं कर सके।
सोशल मीडियाकर्मियों के इस आचरण का जब पत्रकारों ने विरोध किया तब अपर जिला सूचना अधिकारी ने आकर उन्हें हट जाने के लिए कहा। सोशल मीडिया कर्मी जब तक हटे तब तक उपमुख्यमंत्री उठने का मन बना चुके थे। फिर पत्रकारों के बीच में भी घुसे ऐसे लोग जिनका पत्रकारिता से कोई लेना देना नहीं है, उन्होंने वही प्रश्न पूछने शुरू कर दिये जिनके समाधान के लिए उपमुख्यमंत्री अधिकारियों को पहले ही निर्देशित कर चुके थे। सही मायनों में पत्रकारों के बीच से वह सवाल-जवाब नहीं हो सके जिनका जनपद के विकास से कोई वास्ता था।
जनपद में ऐसे पत्रकारों की भीड़ बढ़ रही है जो स्वयं को किसी भी नियम-कानून से नियंत्रित नहीं मानती। जिन लोगों का समाचार पत्र और चैनलों से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है वह लोग निर्भय होकर जिलाधिकारी और एसएसपी ही नहीं विधायक, सांसद, मंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर के नेताओं तक की प्रेसवार्ता और सभाओं में भी अपनी-अपनी माइक आईडी लेकर अराजकता की स्थिति पैदा करते रहते हैं। इन बहुत से सोशल मीडियाकर्मियों को सूचना विभाग तक नहीं जानता वह लोग पत्रकारिता के नाम पर शासन-प्रशासन के सामने कुर्सियों पर बैठकर हंसी मजाक और स्तरहीन बातें करते दिखाई देते हैं। यही स्थिति रही और सोशल मीडिया के प्रेसवार्ता में घुसने के लिए कोई नियम नहीं बनाये गये तो, एक दिन एटा में भी किसी शासन-प्रशासनिक अधिकारी अथवा राजनैतिक दल के नेता के साथ अतीक अहमद जैसी घटना घटित हो सकती है, क्योंकि पत्रकार और मीडिया के नाम पर रोकटोक न होने के कारण कोई भी अपराधी घुस सकता है।
जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय से अनुरोध है कि सूचना विभाग से पत्रकारों और टीवी चैनलों के सम्वाददाताओं की सूची मंगा लें, उस सूची को कम्प्यूटरों में रखें और जब भी प्रेसवार्ता करनी हो तो प्रेसवार्ता के अनुरोध पत्र के साथ-साथ उस सूची को भी वाट्स अप मैसेज अपर जिला सूचना अधिकारी को निर्देशित करें कि वह पत्रकारों को आमंत्रित करें जब आमंत्रण पत्र के साथ-साथ नाम की सूची होगी तो बगैर आमंत्रित किये जाने पर भी आने वाली अनधिकृत भीड़ से बचा जा सकेगा। अपर जिला सूचना अधिकारी उस स्तर का अधिकारी नहीं है जो इन सभी से झगड़कर मीडिया के नाम पर अनधिकृत भीड़ को रोक सके। प्रेसवार्ता की भीड़ को तो जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के स्तर से ही रोका जा सकता है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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