
सोनभद्र। ओबरा तहसील के नेवारी की पहाड़ी में अमूल्य रत्न भंडार दफन हैं। यहां न केवल इमारती पत्थरों की भरमार है, बल्कि स्फटिक, हकीक, अगेट और जैस्पर जैसे रत्न भी छिपे हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के भूविज्ञानी प्रो. विभूति राय और उनकी टीम ने यह दावा किया है। प्रो. राय की मानें तो इन पहाड़ियों को संरक्षित कर प्रदेश सरकार बहुमूल्य रत्नों का उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्यों की सूची में भी शामिल हो सकता है।
लगभग एक अरब 70 करोड़ वर्ष पूर्व समुद्र के शूक्ष्म धूल कण से निर्मित सोनभद्र की चट्टानों और पहाड़ियों की पूरे विश्व में अलग पहचान है। सोन नदी के किनारे स्थित इन पहाड़ियों में आदिमानव का निवास स्थल होने के साथ ही पत्थर के औजार भी मिले हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के भूविज्ञानी प्रो. विभूति राय के अब तक के शोध में अमूल्य रत्न स्फटिक, हकीक, अगेट और जैस्पर जैसे रत्न प्राकृतिक अवस्था में मिले हैं। ये रत्न पालिश होकर बाजार में ऊंचे दाम पर बिकते हैं। प्रो. राय अब तक दो दर्जन बार इन पहाड़ियों पर शोध कर चुके हैं। पिछले तीन दिन से वह अपनी टीम के साथ डटे हैं। उनका दावा है कि नेवारी की पहाड़ी में बहुमूल्य रत्न भंडार हैं। इन रत्नों को खोजने के लिए सरकार को काफी प्रयास करना होगा। शनिवार को नेवारी इलाके में ऐसे कई रत्न मिले हैं,