दयालबाग सत्संगी प्रकरण अपडेट्स

113 साल पुरानी सत्संग सभा, 1942 से शुरू हुआ विवाद
राधा स्वामी सत्संग सभा दयालबाग की स्थापना 26 मार्च 1910 को हुई थी
बाईलॉज के मुताबिक, 40 सदस्यीय सत्संग सभा का गठन धार्मिक आध्यात्मिक, शैक्षिक गतिविधियों के लिए किया गया था।
ब्रिटिश काल में जो जमीनें सत्संग सभा ने अधिग्रहित की और दान में मिलीं सभा उनका प्रबंधन करती है।
1942 में ब्रिटिशकालीन भारत में कॉलोनी और खेतों के नाम पर जमीन अधिग्रहण के प्रस्ताव हुए, खासपुर, जगनपुर, घटवासन, मानेहरपुर, नगला तल्फी, पोइया घाट, लाल गढ़ी के किसानों के साथ विवाद शुरू हो गए, यह विवाद अभी भी जारी हैं।
[ आगरा बिग ब्रेकिंग
दयालबाग के बन रहे जवाहर बाग जैसे हालात
आपको याद होगा सात साल पहले मथुरा के जवाहर बाग में कब्जा हटाने को लेकर प्रशासन से संघर्ष हुआ था।
सत्संग सभा दयालबाग के कब्जे से रास्ते और खेल के मैदान मुक्त कराने को लेकर भी वैसे ही टकराव की स्थिति बन सकती है।
इसकी वजह है कि सत्संग सभा प्रशासन के हटते ही कब्जा कर लेती है। प्रशासन एक बार फिर कार्रवाई की तैयारी में है। वहीं सत्संग सभा के तेवर भी तीखे हैं।
मथुरा के जवाहर बाग में वर्ष 2014 में रामवृक्ष यादव के संगठन स्वाधीन भारत विधिक सत्याग्रह को दो दिन के लिए प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी।
इसके बाद रामवृक्ष के संगठन ने पार्क में कब्जा कर लिया। यहां उनकी अलग सरकार चलती थी।
झोपड़ियां बनाकर कथित सत्याग्रही रहने लगे। इसके बाद प्रशासन ने जब दो जून 2016 को इसे खाली कराने की कोशिश की तो संघर्ष हो गया।
दयालबाग क्षेत्र के आसपास के गांवों के लोगों का कहना है कि अब दयालबाग क्षेत्र में भी ऐसी ही स्थिति बनती जा रही है।
सत्संग सभा अपना कब्जा छोड़ने को तैयार नहीं है। यहां वे अपनी सरकार अपने तरीके से चलाते हैं। यहां भी जवाहर बाग जैसे हालात बनते जा रहे हैं।