स्वयं में शांति प्रिय होना ही शांति का प्रथम प्रयास है- प्रो शैला परवीन

स्वयं में शांति प्रिय होना ही शांति का प्रथम प्रयास है- प्रो शैला परवीन

वाराणसी

उक्त विचार प्रो शैला जी ने शिक्षा शास्त्र विभाग महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी द्वारा आयोजित ‘अन्तर्राष्ट्रीय शांति दिवस’ के अवसर पर आयोजित परिसंवाद मे मुख्य वक्ता के रूप मे कहे.प्रो शैला परवीन ने कहा कि शांति सभी के लिए न्याय के रूप में प्रदर्शित की गयी है जिसका तात्पर्य केवल हिंसा की अनुपस्थिति से नहीं है बल्कि इसमें सभी के लिए न्याय की उपस्थिति पर अत्यधिक बल दिया गया है|शांति के स्वरूप के रूप में सकारात्मक शांति एक ऐसी स्थिति है जहां सीधी हिंसा के सभी प्रकार अनुपस्थित हैं और जो समाज के सभी व्यक्तियों एवं वर्गों के लिए एक नए मानदंड को स्थापित करने का प्रयास करें |सकारात्मक शांति, शक्ति और संसाधनों के उचित वितरण को भी संदर्भित करती है | विषय प्रवर्तन करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो शैलेंद्र वर्मा ने कहा कि सभी व्यक्ति वास्तव में किसी भी प्रत्यक्ष और संरचनात्मक प्रतिरोध के बिना अपनी वास्तविक क्षमता का पता लगा सकते हैं और अपने लक्ष्य को सफलतापूर्वक एवं शांतिपूर्वक प्राप्त कर सकते हैं |ऐसा समाज सद्भाव सहित और सम्मान की नई ऊचाई पर ही तैयार हो सकता है | संयोजक प्रो सुरेंद्र राम ने कहा कि हजारों उन खोखले शब्दों की तुलना में बेहतर एक शब्द है जो शांति कहलाता है| आज पूरा विश्व बुद्ध के शांति संदेश का आभारी है| डॉ वीणा वादिनी ने कहा कि विद्यार्थियों में शांति स्थापित होना बहुत ज़रूरी है क्योकि इससे समाज मे शान्ति स्थापना करने के उपरांत विद्यार्थियों में अहिंसा, प्रेम तथा शांति के प्रति लगाव का निर्माण करना पड़ेगा जिससे विश्व में शांति को बढ़ावा मिलेगा |इसके लिए विद्यार्थियों को योग ध्यान इत्यादि पर भी ध्यान देना चाहिए|डॉ दिनेश कुमार ने कहा कि शांति के लिए व्यक्तियों में विनम्रता की भावना अत्यंत आवश्यक है ,जो उन्हें समय एवं परिस्थिति के अनुसार अपने को ढालने में सहायता करती है |समाज में रहते हुए हमें सबको अपना समझना चाहिए तथा एक दूसरे का सम्मान करने की भावना का विकास करना चाहिए| श्री विनय सिंह ने महात्मा गांधी के विचारों पर आधारित अपने वक्तव्य में कहा कि गांधीजी का जीवन दर्शन सत्य ,अहिंसा , निष्ठा सहानुभूति इत्यादि मानवीय गुणो के साथ परिपूर्ण था| आज समाज को ऐसे ही गुण विकसित करने की आवश्यकता है जिससे पूरे विश्व में शांति स्थापित किया जा सके | श्रीमती शिखा राय ने विश्व में शांति स्थापना हेतु आपसी भावनात्मक लगाव को विकसित करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया|प्रो रमा कांत सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि शांति शिक्षा की आवश्यक्ता पर ज़ोर देते हुए कहा कि आज हमारा सामाजिक वातावरण शांतिपूर्ण करने की आवश्यकता है| समाज में शांति की स्थापना हेतु हमारा व्यक्तिगत तौर पर शांत मन को विकसित करना आवश्यक है |हमारी शिक्षा प्रणाली ऐसी होनी चाहिए जो विश्व बंधुत्व ,नैतिक मूल्य सहित विद्यार्थियों के भविष्य में शांति को केंद्र में रखते हुए वसुधैव कुटुंबकम की भावना को क्रियान्वित करने में सक्षम हो सके | मुख्य वक्ता का स्वागत समन्वयक प्रो शैलेंद्र वर्मा द्वारा पुष्प गुच्छ देकर किया गया|परिसंवाद का संचालन सुश्री रोहिणी मालवीय व शिखा राय के द्वारा किया गया |इस अवसर पर डॉ राखी देव ,डॉ ध्यानेंद्र मिश्रा, डॉ रमेश प्रजापति, डॉ ज्योत्सना राय , शालिनी मिश्रा,अर्जुन कुमार सिंह ,आलोक कुमार, इंद्रजीत यादव, अलका यादव, आरती विश्वकर्मा, आराधना, आकृति राय ,रितिका बिन्द, रामप्रकाश, प्रकाश खत्री, रविकांत, प्रजापति संजीत कुमारी ,चंपा विश्वास, नीलू कुमारी ,दीपमाला जायसवाल, राम प्रकाश ,विकास कुमार वर्मा, बृजेश कुमार सिंह, अर्चना इत्यादि सहित सभी विद्यार्थी उपस्थित थे। इस कार्यक्रम की जानकारी विश्वविद्यालय के सूचना एवं जन सम्पर्क अधिकारी डॉ. नवरतन सिंह जी ने दी।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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