*दिमाग में चिप लगाने के मानव परीक्षण को अंतिम मंजूरी, रिपोर्ट योगेश मुदगल

न्यूरालिंक चिप के तीन प्रमुख हिस्से
न्यूरालिंक चिप के तीन प्रमुख हिस्से हैं। इसमें एन-1 इम्प्लांट, आर-1 रोबोट और एन-1 यूजर ऐप शामिल है। आईए जानते हैं कि यह किस तरह काम करेंगे…
ये फायदा होगा
- सोचने भर से ऑपरेट हो जाएगा कंप्यूटर
- दिमाग में सोचकर की-बोर्ड से टाइप और माउस का कर्सर चला सकेंगे
- दृष्टिहीन इंसान भी देख सकेंग
- बंदरों में सफल रहा है न्यूरालिंक का परीक्षण
परीक्षण के लिए ये कर सकते हैं आवेदन
न्यूरालिंक ने कहा कि जिन लोगों को सर्वाइकल स्पाइनल कॉर्ड की चोट या एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (एएलएस) से पीडित़ है, वे इस मानव परीक्षण में हिस्सा ले सकते हैं। उनकी उम्र कम से कम 22 साल होनी चाहिए। इसके परीक्षण को पूरा होने में करीब छह साल लगेंगे। इस दौरान प्रतिभागियों को परीक्षण से जुड़े खर्चे जैसे साइट तक आने-जाने का किराया आदि कंपनी की ओर से दिया जाएगा।
आर-1 रोबोट
एन-1 इम्प्लांट सर्जरी आर-1 रोबोट के जरिए होगी। इस ट्रायल में यह भी परखा जाएगा कि आर-1 रोबोट सर्जरी के लिए कितना सुरक्षित है।
एन-1 इम्प्लांट
मरीजों में सर्जरी के जरिए एन-1 इम्प्लांट को मस्तिष्क के उस क्षेत्र में लगाया जाएगा जो शरीर की गतिविधियों को नियंत्रित करता है।
परीक्षण का यह है उद्देश्य
इस परीक्षण के जरिए कंपनी यह देखना चाहती है कि यह डिवाइस मरीजों पर कैसे काम कर रहा है। इसके अलावा इसकी सुरक्षा को भी परखा जाएगा। हालांकि कंपनी ने अभी यह नहीं बताया है कि परीक्षण कब शुरू होगा और इसमें कितने प्रतिभागी शामिल होंगे। इससे पहले मई में कंपनी को ट्रायल के लिए अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन से मंजूरी मिली थी।
चिप की खासियत
- अदृश्य है चिप
- डिवाइस को चार्ज करने की भी जरूरत होगी
- ऐप से आपरेट कर सकेंगे
एन-1 यूजर ऐप
एन-1 इम्प्लांट के संचालन के लिए एक एन-1 यूजर ऐप भी होगा। इसके बाद लोगों को इस पूरे सिस्टम का फीडबैक देना होगा।