
एटा, । पूर्वांचल के जिलों के पशुओं में लंपी स्किन डिजीज संक्रमण अधिक फैलने के कारण शासन ने पशु पैंठ व मेलों पर पूर्णत प्रतिबंध लगा दिया है। साथ ही पशुओं को एक से दूसरे जनपद में लाने-ले जाने पर भी रोक लगा दी है।
शासनादेश के अनुसार रविवार को मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. अनिल कुमार सिंह ने बताया कि प्रदेश में पूर्वांचल के जिलों में पशुओं के अंदर लंपी स्किन डिजीज संक्रमण अधिक फैल रहा है। उसके कारण जिले में गाय, भैंस, बकरी, घोड़ा, भेड़ आदि पशुओं के आवागमन पर रोक लगाई गई है।
इसके साथ ही जिले में लगने वाले पशु मेले, पशु हाट एवं पशु पैंठों को भी 31 अक्तूबर तक प्रतिबंधित किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में लंपी संक्रमण नियंत्रण होने के बाद ही एक से दूसरे जिले में पशुओं के लाने-ले जाने और पशु पैंठ व मेले से प्रतिबंध हटाया जाएगा। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने यह भी बताया कि शासनादेश का उल्लंघन करने वालों पर विभागीय और प्रशासन स्तर से भी कार्रवाई की जाएगी।
जिले में चार स्थानों पर लगाती है बड़ी पशु पैंठ पशुपालन विभाग के अनुसार जिले के अंदर कस्बा मिरहची, जलेसर, अलीगंज के अलावा गांव दलाशहपुर में बड़ी पैंठ लगती है। इनमें दूसरे जनपदों से भी बड़ी संख्या में पशुओं को लाकर बेचा और खरीदा जाता है।
विभागीय टीमें कर रहीं पशुओं की जांच और सर्वेक्षण
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि जिले में लंपी स्किन डिजीज रोकथाम के लिए विभागीय टीमें जनपद के बार्डर वाले गांव में पहुंच खुर वाले सभी पशुओं की जांच कर रही है। टीम अब तक 300 से अधिक गांव में पशुओं की जांच कर चुकी है, लेकिन अब तक कही भी कोई पशु लंपी संक्रमित नहीं पाया गया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर किसी भी पशु लंपी संक्रमण संबंधी लक्षण देखने को मिले, तो उसकी सूचना तत्काल नजदीकी पशु अस्पताल और हेल्पलाइन नंबर पर दे सकते है।