भाषा भावों की मोहताज नहीं है – प्रोफेसर आनंद कुमार त्यागी
वाराणसी

भाषा का विस्तृत होता जनक्षेत्र हमें ये बताता है कि किस तरह से जो जनभाषा है वह धीरे धीरे साहित्यक भाषा बन चुकी हैं। भाषा की समर्थता इसी मे है कि वो एक समय के बाद जनभाषा बन जाती है। और इसलिए हमारी भाषा का जनक्षेत्र विस्तृत हो चुकी है इतिहास विजेताओ द्वारा लिखा जाता है इसलिए उसमे प्रामाणिकता नहीं होती है लेकिन जो साहित्य में है वो प्रामाणिक है क्योंकि एक साहित्यकार बेखौफ होता हैं। उन्होंने आगे कहा कि इतिहास जिसकी उपेक्षा करता है साहित्य उसी की चिन्ता करता हैं।भाषा भावों की मोहताज नहीं हैं और भाव भाषा की मोहताज नहीं हैं भाषा सिर्फ एक साधन हैं और अत्यंत गहरा और भाव को पूरी तरह व्यक्त करना भाषा में इतनी समर्थता नहीं है। भाषा के लोग हीं विज्ञान के जनक हैं। उक्त बातें हिंदी भाषा का विस्तृत होता जनक्षेत्र के बारे में प्रो आनन्द कुमार त्यागी अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहीं। अपने सम्बोधन के दौरान नक़्शानामा के कवि सरफ़राज आलम ने कहा कि हम नक्शे के माध्यम से दुनिया को, समाज को पढ़ने और समझने की कोशिश करते हैं। नक़्शा हर सत्ता का खेल है जिसके माध्यम से सीमाएं ही विभाजित नहीं होती मनुष्यता भी संकटग्रस्त होती है। एक यान्त्रिक नक़्शा धीरे धीरे ध्वस्त होता है और इसके भीतर से जीवनानुभवों की अनेक आकृतियां उभरती हैं।
हिंदी भाषा का विस्तृत होता जनक्षेत्र और भित्ति पत्रिका भाषाघर के बारे में कहीं कि शक्तिशाली भाषाएं लोकभाषाओं को अपने में समाहित कर लेती हैं। हिंदी का जनक्षेत्र तभी बढे़गा जब हम खुद को उसमें महसूस करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर बात खूबसूरत हो तो उसे हर मंच से बोलना चाहिए। उक्त व्यक्तव्य हिंदी और अन्य भारतीय भाषा विभाग म. गां .का .वि. के अध्यक्ष प्रो निरंजन सहाय कहीं। उक्त सत्र में शोधार्थियों ने काव्यपाठ किया था जिसमें आरती प्रतिभा हनुमान जन्मेजय, वरूणा सृष्टि खुश्बू आकाश स्तुति हेमलता आदि ने किया। हिंदी और अन्य भारतीय भाषा विभाग महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ द्वारा आयोजित लोकार्पण सह काव्यगोष्ठी का आज 16 सितम्बर 2023 को सम्पन्न हुआ। इस संगोष्ठी में आमंत्रित कवि सरफ़राज आलम और अन्य वक्ताओं ने नक़्शानामा काव्य संग्रह और भाषाघर पर अपनी बात रखी। पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रो अनुराग कुमार प्रो राजमुनि प्रो रामाश्रय सिंह प्रो अनुकूलचन्द राय डॉ प्रीति डॉ अविनाश सिंह डॉ सुरेन्द्र प्रताप सिंह सहित आरती तिवारी उज्जवल आकाश जन्मेजय हनुमान प्रज्ञा मनीष प्रवीण सौरभ प्रतिभा आदि शोधार्थी उपस्थित रहें।
कार्यक्रम का संचालन उज्जवल सिंह और आरती तिवारी ने किया।