नादान परिंदे साहित्य मंच का बढ़ता कारवां नादान परिंदे की ऊंची उड़ान।
खुशबू बनकर गुलो से उड़ा करते है।
धुंआ बनकर पर्वतों से उड़ा करते है।
ये कैंचियां खाक हमे उड़ने से रोकेंगी।
हम तो परो से नही हौशलो से उड़ा करते है।
वाराणसी

आज देखा जाए तो समाजसेवा शब्द एक फैशन की तरह इस्तेमाल होने लगा है। बड़े-बड़े संस्था व एन जी ओ बनाकर सामूहिक लूट की अनेक घटनाएं हमारे सामने आती है जिससे की अब सभी सामाजिक संस्था व एन जी ओ को संदेह की दृष्टि से देखा जाने लगा है।
वैसे आज भी कुछ ऐसे सामाजिक संस्थाएं है जो कि मानव सेवा ईश्वर सेवा के सिद्धांत पर चलते हुए जरूरतमंदों के लिए पूर्ण समर्पण भाव से समाज सेवा का कार्य करते हैं, और बिना किसी शोर-शराबे के अपना दायित्व निभाते हैं।
ऐसी ही वाराणसी की एक संस्था है नादान परिंदे साहित्य मंच
काशीरत्न उपाधि से सम्मानित वरिष्ठ समाजसेवी डॉ सुबाष चंद्र के नेतृत्व में सामाजिक
साहित्यिक संस्था नादान परिंदे साहित्य मंच को चार सदस्यों ने पौधे के रूप में लगाया जो आज विशाल वट वृक्ष के रूप में दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी से सुरूवात कर आज संस्था की शाखाएं देश के प्रत्येक प्रदेशो के साथ ही साथ जर्मनी और ग्रीस यूनान तक फैल चुकी है। यह संस्था कोरोना काल के संकट के समय कई साहित्यिक ऑनलाइन कार्यक्रम भी आयोजित किया और जरूरतमंद लोगों को यथासंभव सहायता भी किया गया जो कि ऑनलाइन कार्यक्रम में लगभग 800 लोगों को सम्मान के साथ आर्थिक सहयोग देकर सम्मानित भी किया गया। कड़कड़ाती ठंड में संस्था के सभी सदस्यों द्वारा वाराणसी और जिले से सटे मिर्जापुर तक अपने संसाधन से जाकर लगभग 500 से ज्यादा जरूरतमंदों लोगो को कंबल व गर्म कपड़ों का वितरण किया गया है समय-समय पर संस्था द्वारा झुग्गी बस्तियों में मलिन बस्तियों में रहने वाले जरूरतमंद बच्चों को पुस्तकों व अन्य पठन सामग्री का भी वितरण किया जाता है। जिससे कि कोई भी बच्चा संसाधन के अभाव में अशिक्षित ना रहे। पर्यावरण को विशेष रूप से महत्व देते हुए व जीवन में पर्यावरण की उपयोगिता नामक संगोष्ठी का आयोजन कर पर्यावरण की रक्षा के लिए सड़क किनारे पार्कों में तथा तालाबों के किनारों पर पौधारोपण का कार्य किया जाता है।
चेहरे पर सदैव शालीनता सौम्यता एवं मुस्कुराहट रखने वाले संस्था के संस्थापक अध्यक्ष डॉ सुबाष चंद्र बताते हैं कि आप अपने दिल से किसी की सच्ची मदद करके देखिए आपको जिस आत्म संतुष्टि का अनुभव होगा और वह संतुष्टि फिर किसी चीज से नहीं मिल सकती समाज सेवा का मतलब केवल खाना दवाइयां बांटना ही नहीं होता है बल्कि किसी योग्य व्यक्ति को उसके अनुरूप रोजगार दिला कर उसे स्वावलंबी बनाना भी एक प्रकार की समाज सेवा है। हमारी संस्था संसाधनों की कमी से जूझ रहे जरूरतमंदों को हरसंभव मदद दिलाने के लिए संकल्पित हैं।
संस्था के सभी पदाधिकारी व सदस्यों का आभार व्यक्त करता हूं जो मेरे हर कार्य में मेरे साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का कार्य करते हैं और हर समय जरूरतमंदों की मदद के लिए तैयार रहते है।रिर्पोट जमील अख़्तर