भारत-अमेरिका मिलकर बनाएंगे फाइटर जेट इंजन, 80% टेक्नोलॉजी देगा भारत को, बाइडेन-मोदी का 8 सितंबर को द्विपक्षीय बैठक

अमेरिकी संसद ने भारत और अमेरिका के बीच हुई फाइटर एयरक्रॉफ्ट इंजन की डील को मंजूरी दे दी है। भारत की हिंदुस्तान ऐयरोनॉटिक्स लिमिटेड और अमेरिका की GE ऐयरोस्पेस के बीच साथ मिलकर फाइटर जेट के इंजन बनाने को लेकर एग्रीमेंट हुआ था। इस डील को मंजूरी मिलने से दोनों देशों के बीच स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप और मजबूत होगी।
इस साल जून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्टेट विजिट के दौरान भारत और अमेरिका के बीच इस डील पर सहमति बनी थी। अब बाइडेन सरकार को इस डील को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिकी संसद ने भी मंजूरी दे दी है। इस डील के तहत अमेरिका ने भारत के साथ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, जेट इंजन का निर्माण और लाइसेंस का एग्रीमेंट किया था।
GE एयरोस्पेस कंपनी F-414 फाइटर जेट इंजन के निर्माण के लिए अपनी 80% तकनीक भारत को ट्रांसफर करेगी। इस टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का मकसद हल्के लड़ाकू विमान MKII की क्षमताओं को बढ़ाना है। ये लड़ाकू इंजन ‘तेजस मार्क-2’ के लिए बनाए जाएंगे। मार्क-2 तेजस का एडवांस मॉडल है और इसमें GE-F414 इंजन लगना है।
वहीं अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन 7 सितंबर को भारत के दौरे पर आ रहे हैं। वो 9-10 सितंबर को दिल्ली में होने वाली G-20 समिट में शामिल होंगे। इससे ठीक एक दिन पहले 8 सितंबर को बाइडेन PM मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। व्हाइट हाउस ने ये जानकारी दी। व्हाइट हाउस ने बताया- दोनों नेताओं के बीच रूस-यूक्रेन जंग पर बातचीत होगी। इस दौरान इकोनॉमिक और सोशल लेवल पर जंग के असर को कम करने पर चर्चा होगी। इसके अलावा दोनों नेता गरीबी से लड़ने के लिए वर्ल्ड बैंक सहित दूसरे मल्टीलेटरल डेवलपमेंट बैंक की क्षमता बढ़ाने और दूसरे कई ग्लोबल चैलेंज पर भी बात करेंगे।