संकुल स्तरीय दिशा बोध कार्यशाला का आयोजन किया

एटा । सरस्वती विद्या मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल एटा के सभागार में कक्षा 12 की छात्राओं का मार्गदर्शन करने से लिए संकुल स्तरीय दिशा बोध कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिलाधिकारी एटा अंकित अग्रवाल, उप जिलाधिकारी अलीगंज रश्मिलता, मंत्री श्री विद्या परिषद विद्योतमा, चार्टर्ड अकाउंटेंट दुर्गेश अग्रवाल, स्वामी विवेकानंद शिक्षा प्रसार समिति के अध्यक्ष क्षेत्रपाल उपाध्याय ,मंत्री ब्रज नंदन माहेश्वरी ,सरस्वती विद्या मंदिर के अध्यक्ष सुधीर गुप्ता, प्रबंधक वीरेंद्र वार्ष्णेय, प्रधानाचार्य प्रमोद कुमार वर्मा, प्रधानाचार्य सरस्वती विद्या मंदिर आगरा चारु शर्मा ने संयुक्त रुप से मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्प अर्पित करके किया। संकुल स्तरीय कार्यशाला में एटा ,आगरा, फिरोजाबाद की छात्राओं की उपस्थिति रही। कार्यशाला की व्यवस्था प्रमुख सोनिया माहेश्वरी रही। इस अवसर पर जिलाअधिकारी अंकित अग्रवाल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज परिवर्तन के साथ-साथ हमको अपना लक्ष्य इस प्रकार चयनित करना चाहिए कि उसे पाकर हम आज के समाज के अनुसार खड़े हो सकें । हमको अनुशासित तरीके से तैयारी करनी चाहिए और सबसे पहले हमें स्वयं यह तय कर लेना चाहिए कि भविष्य में हम क्या बनना चाहते हैं? छात्र दैनंदिनी के प्रयोग से समय नियोजन एवं कार्य योजना पूर्व में ही तैयार करने की आदत बनती है। विषय ज्ञान के साथ-साथ प्रार्थना में उच्चारित विषय वस्तु का दैनिक अभ्यास मन मस्तिष्क को सबलता प्रदान करता है। लक्ष्य निर्धारित हो जाने से ऊर्जा का सदुपयोग होता है। लक्ष्य के प्रति किया जाने वाला प्रयास एकाग्रता को बढ़ाता है। लक्ष्य प्राप्ति के लिए मन:स्थिति का भी योगदान होता है। कभी-कभी परिस्थिति भी प्रभावित करती है किंतु लगन एवं आत्मविश्वास के साथ किया जाने वाला प्रयास ,अभ्यास सफलता की ओर ले जाता है। जैसे-जैसे हम लक्ष्य के निकट होते हैं वैसे वैसे उत्साह या तो बढ़ता है, या फिर घटता है। यह हमारी पूर्व की तैयारी पर निर्भर करता है । हमें समय नियोजन को महत्व अवश्य देना चाहिए। हमें सिर्फ अच्छे अंक के लिए ही लक्ष्य नहीं लेना है बल्कि समय नियोजन के साथ कार्यप्रणाली, जीवन मूल्यों का भी ध्यान रखना चाहिए। सूर्योदय से पूर्व जागरण करना हमें ऊर्जावान बनाता है क्योंकि इस कार खंड में वातावरण में सर्वत्र सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है ।यह हमारी पाचन शक्ति को भी प्रभावित करता है। पाचन शक्ति का संबंध स्वास्थ्य से होता है ।सफल जीवन के लिए उत्तम स्वास्थ्य का होना भी आवश्यक है। मन की शिथिलता हमें लक्ष्य प्राप्ति से दूर धकेलती जाती है । हमें अपनी कार्य योजना को प्राथमिकता के आधार पर निर्धारित करना चाहिए। उन्हें लिखित रूप में तैयार करना चाहिए। इसके लिए क्रमांक का प्रयोग करना चाहिए ।उसी की अनुसार कार्य का निष्पादन करना चाहिए। कार्य निष्पादन के लिए समय सीमा भी पूर्व में ही सुनिश्चित कर लेनी चाहिए। इससे टालने की आदत दूर होती है। कार्य योजना को पूर्ण करने में संकल्प शक्ति का भी महत्व होता है। शीघ्र अतिशीघ्र कार्य निष्पादन की आदत व्यक्तित्व विकास में सहायक बनती है। लक्ष्य प्राप्त करने के लिए नकारात्मक व्यक्तियों, नकारात्मक वातावरण ,नकारात्मक वस्तुओं से दूर रहना चाहिए। सफलता प्राप्ति के लिए तीव्र चिंतन शैली ,तीव्र लेखन गति का विकास भी करना आवश्यक है। तभी हम परीक्षा में सभी प्रश्नों को निर्धारित समय सीमा की अंतर्गत हल कर सकते हैं। इसके लिए निरंतर अभ्यास की आवश्यकता होती है। हमें जीवन में कुछ चीजों को, कुछ बातों को छोड़ने, नकारने की भी आदत डालनी चाहिए, जो हमारी सफलता में बाधक हो सकती हैं। हमें एक साथ कई लक्ष्य एक ही समय के लिए नहीं तय करने चाहिए ,जो हमें वास्तविक लक्ष्य से भटका सकते हैं क्योंकि समाज में सफल को ही गुणवान और असफल को गुणहीन माना जाता है। लक्ष्य दो प्रकार के होते है । अल्पकालिक लक्ष्य और दीर्घ कालीन लक्ष्य। अल्पकालिक लक्ष्य की पूर्ति धीरे-धीरे हमें दीर्घकालिक लक्ष्य को प्राप्त कराती है। छात्र जीवन ही अनुशासन सीखने का स्वर्णिम काल होता है। अनुशासित व्यक्ति ही आदर्श नागरिक रूप में अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन करता है। किसी भी कार्य को करते समय हमारी नीयत भी ठीक होनी चाहिए ,हमें अपनी शक्ति, बुद्धि, दक्षता, क्षमता का प्रयोग मानव कल्याण कार्य के लिए ही करना चाहिए।हमें देश भक्ति का भाव भी अपने मन में संजोकर रखना चाहिए। देश हमें देता है सब कुछ ,हम भी तो कुछ देना सीखें । यह पंक्ति हमें जीवन भर आदर्श नागरिक बने रहने के लिए प्रेरित करती है । कार्य योजना बनाना और समय नियोजन के साथ निर्धारित समय सीमा में पूर्ण करना ही हमें सफल बनाता है। इसके अतिरिक्त विज्ञान वर्ग, वाणिज्य वर्ग, मानविकी वर्ग से संबंधित विषय विशेषज्ञों ने छात्राओं का माध्यमिक स्तर की परीक्षा से लेकर आगामी प्रतियोगी परीक्षाओं तक की तैयारी करने के लिए दिशा बोध किया। कार्यक्रम के समापन प्रेमलता शास्त्री जी ने भी छात्रों को आदर्श नागरिक बनकर समाज के हित में अपना योगदान करने के तरीके समझाए। कार्यक्रम के समापन पर कार्यक्रम के संकुल स्तरीय संयोजक कृष्ण कांत द्विवेदी ने सभी का आभार व्यक्त दिया। इस अवसर पर उप-प्रधानाचार्य प्रेमचंद, डॉक्टर राहुल शर्मा, डॉ अजय उपाध्याय, राहुल चौहान, सूबेदार सिंह शाक्य, जितेंद्र सिंह डॉ संजीव सिंह, विनय वशिष्ट, आश्चर्य वार्ष्णेय, आलोक त्रिवेदी ,लवली शर्मा ,सुनीता जैन, श्याम सुंदर शुक्ला, छत्रपाल सिंह शिक्षक स्टाफ की उपस्थिति रही।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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