
गिरफ्तारी की सूचना को थाने में पुलिस अफसर तैनात होंगे
अब पुलिस किसी व्यक्ति को अपराध के शक में मनमाने तरीके से हिरासत में नहीं रख सकेगी। हिरासत में लिए गए या गिरफ्तार व्यक्ति की सूचना हर हाल में तत्काल देनी होगी। इसके लिए देश के हर थाने में एक पुलिस अधिकारी की तैनाती होगी। सीआरपीसी और आईपीसी में प्रस्तावित बदलाव के तहत इस महत्वपूर्ण व्यवस्था का कानूनी प्रावधान किया जा रहा है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बिना परिजनों की जानकारी के हिरासत में लेने या गिरफ्तारी की कई राज्यों से मिलीं शिकायतों के बाद यह फैसला किया गया है।
ऐसे होगा बदलाव एक अधिकारी ने बताया कि जिस तरह से महिलाओं से जुड़े अपराध के मामले में महिला डेस्क बनाई जा रही हैं, वैसे ही गिरफ्तारी की सूचना के लिए भी समर्पित डेस्क या जवान की तैनाती होगी। इसे बाद में तकनीकी रूप से भी संभव बनाया जा सकता है। संबंधित परिवार को एसएमएस या अन्य तकनीकी माध्यमों का उपयोग करते हुए ऑटोमेटेड तरीकों से जानकारी दी जा सकती है। हालांकि, कई राज्य पहले से पुलिस बल की कमी का दबाव झेल रहे हैं। ऐसे में यह सवाल भी उठाया गया है कि एक पुलिस अधिकारी को विशेष रूप से यह जिम्मेदारी देने से अतिरिक्त दबाव बनेगा।
पुलिस हिरासत में मौत से सवाल
पुलिस हिरासत में होने वाली मौत से पुलिसिया तरीके पर सवाल उठता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2021-2022 के दौरान पुलिस हिरासत में मौत के कुल 175 मामले दर्ज किए गए। वहीं, 2020-2021 में 100, 2019-2021 में 112, 2018-2019 में 136 और 2017-2018 में 146 हिरासत में मौत के मामले दर्ज किए गए।
शिकायतकर्ता को कार्रवाई के बारे में जानने का हक
अगर कोई शिकायतकर्ता है तो वह अपनी शिकायत के बारे में तय समय, अधिकतम 90 दिन में जानकारी हासिल कर सकता है। पुलिस की जवाबदेही होगी कि वह पीड़ित पक्ष को जानकारी मुहैया कराए। इन सभी मामलों में उल्लंघन की स्थिति में पुलिस के विरुद्ध कार्रवाई का प्रावधान होगा।