खरी – अखरी _त्वरित प्रतिक्रिया_
प्रजातंत्र जीवित रखने में सफल रहा विपक्ष

जीत सुनिश्चित देखकर तो बुजदिल भी लड़ाई के मैदान में उतर जाता है लेकिन वास्तविक रूप से बहादुर वह है जो पराजय सुनिश्चित जानकर भी जंग करने अपनी जान की बाजी लगा देता है।
वैसा ही हो रहा था गत तीन दिनों से देश की सबसे बड़ी पंचायत के भीतर।
विपक्ष को मालूम था कि मोदी सरकार के खिलाफ उसके द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव संख्या बल के कारण किसी भी हालत में स्वीकार नहीं होगा। पराजय निश्चित है। इसके बावजूद भी विपक्ष ने मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया।
भले ही सत्ता पक्ष अविश्वास प्रस्ताव गिर जाने से अपने हाथों अपनी पीठ थपथपा रहा है। चाटुकार मीडिया मोदी सरकार की विरुदावली का गायन कर रहा है, मगर सैध्दांतिक विजय तो विपक्ष की ही हुई है।
मणिपुर के हालातों पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जिस तरह से अपने ओंठ सिल रखे थे उसकी सिलाई तोड़ने की खातिर ही तो विपक्ष ने देश की सबसे बड़ी पंचायत में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था और वह उस समय अपने अभियान में शत प्रतिशत सफल हुआ जब अविश्वास प्रस्ताव का जबाव देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लोकसभा में खड़े होकर जबाव देने विवश होना पड़ा।
भले ही विपक्ष द्वारा पेश किया गया अविश्वास प्रस्ताव संख्या बल के सामने पराजित हो गया है मगर विपक्ष लोकतंत्र को जीवित रखने में शत प्रतिशत सफल रहा है ।
अश्वनी बडगैया अधिवक्ता
स्वतंत्र पत्रकार