द्वेष की आग में खाक हुये मानवीय रिश्ते एवं माननीय न्यायालय के आदेश

-स्वास्थ विभाग सुर्खियों में-

द्वेष की आग में खाक हुये मानवीय रिश्ते एवं माननीय न्यायालय के आदेश

एटा । जनपद के एक प्रमुख अधिकारी कार्यालय के अंदर सुलग रही आपसी द्वेष भावना की आग एक न एक दिन ज्वालामुखी का रूप धारण करेगी यह तो पता था, लेकिन इस आग में माननीय न्यायालय के आदेश एवं मानवीय रिश्ते खाक होंगे इसकी उम्मीद नहीं थी । बरहाल विषय सोशल मीडिया में वायरल ऑडियो का हैं, जिसमें स्वास्थ विभाग के एक बाबू द्वारा अपने ही प्रमुख अधिकारी के बारे में अमर्यादित शब्दों का प्रयोग किया गया, यही नही बड़बोलेपन में बेलगाम बाबू ने मान मर्यादाओं को लांघ महिला स्टाफ तक को नहीं बख्शा, लेकिन स्थिति तब अधिक डमाडोल हो गयी जब उस ऑडियो को तेजी के साथ सोशल मीडिया में वायरल कर दिया गया । अब अगर निष्पक्षता के साथ दिमागी घोड़े दौड़ाने के बाद सोचो …

कब क्या ध्यान रखना जरूरी हैं -?

क्या नारी वर्ग की लज्जा से सम्बंधित मामलों में पीड़िता के नाम पता का उल्लेख करना उचित हैं ?

क्या किसी महिला के बारे में अन्य व्यक्ति द्वारा जो मजबूत साक्ष्य भी न हो, की अश्लील वार्ता को वायरल करना कितना उचित हैं ?

महिला की लज्जा सम्बन्धी मामलों में समाचार लिखते /वायरल करते समय किन किन बातों का धान रखना चाहिए ?

गर्त में धकेली जा रही पत्रकारिता को बचाने के लिये बुरा मानो या भला

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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