मच्छर रहेंगे तो डेंगू-मलेरिया से बचाव बेमानी — ज्ञानेन्द्र रावत
एटा,बीते तकरीब एक महीने से देश में मौसमी प्रकोप के चलते आई फ्लू,वायरल, वैक्टीरियल संक्रमण, एलर्जी और शरीर में जलन जैसी बीमारियां वैश्विक स्वास्थ्य की दृष्टि से चिंता का सबब बन गयी हैं। इनमें अस्थिर मौसम और बहुतेरी इंसानी गतिविधियों तथा बेतहाशा बढ़ती भीड़ ने अहम भूमिका निबाही है। वहीं जानलेवा डेंगू के बढ़ते खतरे ने चिंता और बढा़ दी है। इसका अहम कारण बारिश के चलते जगह-जगह जलभराव और मच्छरों का पनपना है। सिर व आंखों में तेज दर्द, आंख में असुविधा,मांस पेशियों में दर्द,पेट में बेचैनी,मतली व उल्टी डेंगू के संकेत हैं। इसलिए जरूरी है कि अपने आसपास या घरों में पानी जमा न होने दें। गमलों,कूलर और रखे हुए टायरों में पानी न भरने दें।कूलर के पानी में कैरोसिन या पैट्रोल डालकर रखें और पानी की टंकियों को खुला न छोडे़ं और उनको अच्छी तरह ढककर रखें। इससे मच्छर पनपने की संभावनाएं कम हो जाती हैं। क्योंकि मच्छर का लार्वा कूलर और गमले में 32 फीसदी, ड्रम में 11फीसदी,बाल्टी में 6 फीसदी, कैन मे 4 फीसदी, कंटेनर और पक्षियों के पानी पीने के लिए रखे गये बर्तन में 3 फीसदी व टायरों में 01 फीसदी रहने की संभावना होती है। इस लिए जरूरी है कूलर का पानी तीसरे दिन बदल दें। यदि यह सावधानियां बरत लेते हैं तो काफी हदतक मच्छरजनित बीमारियों से बचा जा सकता है।
