जलेसर के घुंघरू घंटी कारोबार को एक विशेष पहचान मिली

जलेसर के घुंघरू घंटी कारोबार को एक विशेष पहचान मिली

एटा,जलेसर के घुंघरू घंटी कारोबार को एक विशेष पहचान मिल गई। इस कारोबार को जीआई टैग मिला है। इससे यहां के कारोबारियों में खुशी है। इस पहचान के लिए यह काफी समय से लड़ाई लड़ रहे थे। कारोबार में तेजी से रफ्तार आने की संभावना है।
डीएम अंकित कुमार अग्रवाल ने बताया कि जीआई विशेषज्ञ एवं पद्मश्री सम्मानित डॉ. रजनीकान्त की ओर से नाबार्ड उप्र एवं जिला उद्योग केन्द्र, राज्य सरकार के सहयोग से उत्तर प्रदेश के जलेसर मेटल क्राफ्ट (जीआई पंजीकरण संख्या-722), उत्पाद को अब जीआई टैग का दर्जा प्राप्त हुआ है। इंडस्ट्रियल एंड जनरल डेवलपमेंट एसोसिएशन ने दिसम्बर, 2020 में आवेदन किया था। एक लंबी कानूनी प्रक्रिया के उपरांत इसे अब जीआई टैग प्राप्त हो गया। इससे एटा जनपद के जलेसर में रहने वाले सभी शिल्पी, टेडर्स, मैन्यूफैक्चरर्स, निर्यातक इससे लाभान्वित होंगे। अब तक एटा के अतिरिक्त इस उत्पाद को जनपद से बाहर कहीं भी नहीं बनाया जा सकता है और ना ही जीआई टैग के साथ बेचा जा सकता है। यह कानूनी अधिकार सिर्फ जलेसर, एटा जनपद के शिल्पियों को ही प्राप्त हो गया। जलेसर का घुघरू-घंटी एवं अन्य धातुशिल्प को अब जीआई टैग के साथ देश के बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) में शामिल हो गया। प्रदेश का यह 54वां उत्पाद है, जिसे जीआई टैग हासिल हुआ है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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