अमौली एकडंगा गांव मे एक साथ मृत्यभोज का बहिष्कार किया गया।

अमौली एकडंगा गांव मे एक साथ मृत्यभोज का बहिष्कार किया गया।

सिद्धार्थनगर । जनपद के तहसील इटवा अन्तर्गत स्थित ग्राम पंचायत अमौली एकडंगा में एक शोक सभा का आयोजन किया गया।उपस्थित लोगों द्वारा मृतक सेवानिवृत्त राजस्व निरीक्षक रामदास के चित्र पर पुष्प चढ़ाकर श्रद्धांजलि अर्पित कर एक स्वर में मृत्यभोज का बहिष्कार किया गया।
पूज्य बौद्ध भिक्षु बुद्ध रतन एवं अन्य भिक्षु गणो ने उपस्थित लोगों को त्रिशरण एवं पंचशील ग्रहण कराया।
शोकसभा को संबोधित करते हुए भारतीय बौद्ध महासभा के मंडल महासचिव केदारनाथ आजाद ने कहा कि मृत्युभोज मनुष्य को पीडा देने वाली एक कुरीति है जो वर्षों पहले कुछ स्वार्थी लोगों ने समाज मे फैलाई थी लेकिन अब यह समाज के लिए अभिशाप बन चुका है। इसे हम सभी को जल्द से जल्द बन्द कर देना चाहिए।
लार्ड बुद्धा नेशनल चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन जयकिशोर ने कहा कि राजस्थान सरकार ने मृत्युभोज निवारण अधिनियम-1960 के प्रावधानों के अनुसार पूरे राज्य मे मृत्युभोज को पूर्णतया बंद कर दिया है। इसका उलंघन करने पर दंड का भी प्रावधान किया गया है। केन्द्र सरकार को भी चाहिए कि राजस्थान सरकार की तरह पूरे देश मे मृत्युभोज को प्रतिबंधित कर देना चाहिए। जिससे मृत्युभोज से हो रहे समाजिक नुकसान को रोका जा सके।
आयोजक सूर्यपाल ने कहा कि रामदास मेरे पिता जी थे जिनके मृत्यु के पश्चात समाजहित में मृत्युभोज नही करने का निर्णय लेकर मैं समाज को एक नई दिशा देने का प्रयास किया हूं। मृत्युभोज समाज के लिए एक कलंक है।
कार्यक्रम को एडवोकेट बुद्धि प्रकाश, डा.जेपी बौद्ध, राधेश्याम बौद्ध, सुग्गीलाल लेखपाल, सूर्यबली एवं रामचन्द्र आदि लोगों ने संबोधित किया।
इस अवसर पर राम पाल,वीरेंद्र कुमार, विप्लव, उत्तम प्रसाद, ओमप्रकाश, संतोष कुमार, राजेश मद्धेशिया आदि सहित काफी संख्या मे बच्चे एवं महिलाएं मौजूद रहीं।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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