मदरसा अंजुमन इस्लामिया में भर्ती घोटाला
256 छात्रों के लिए 13 सरकारी कर्मियों के बावजूद 11 नई नियक्तियों के लिए हो रहा साक्षात्कार
एक ही परिसर में है दो मदरसों का रजिस्ट्रेशन

गोरखपुर । ज़ीरो टॉलरेंस वाली सरकार के मुखिया के जिले में भर्ती के नाम।पर भ्रष्टाचार का खुला खेल चल रहा है।
मामला जिले में स्थित एक मदरसे का है। अंजुमन इस्लामिया जिसका नवीनीकरण वर्ष 2020 है। इस मदरसे में वर्तमान में 256 छात्र है जिसके लिए अप्रैल 2023 तक मिली जानकारी के अनुसार 13 सरकारी कर्मचारियों की तैनाती थी । इसके लिए सरकारी कोष से वेतन के मद में 13 लाख 24 हज़ार 8 सौ 80 रुपये दिया जाता है। इस हिसाब से प्रति बच्चे पर लगभग ₹ 5175 खर्च होता है।
वही उसी परिसर के पते पर मदरसा अंजुमन इस्लामिया नाम की एक दूसरी संस्था भी पंजीकृत है जिसका अंतिम नवीनीकरण वर्ष 1995 में हुआ था और वर्तमान में यह संस्था कालातीत है। इसी संस्था के लिए एक उर्दू दैनिक समाचार पत्र में 11 नई नियक्तियों के लिये विज्ञापन का प्रकाशन जून माह में हुआ था जिसके लिए जुलाई के दूसरे सप्ताह में साक्षात्कार आयोजित किया गया था लेकिन लगातार फर्जीवाड़े की खबरों के बीच भर्ती प्रक्रिया स्थगित कर दी गई थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार 11 नई नियुक्तियों के लिए लगभग 500 से ज़्यादा आवेदन आये थे।
मंगलवार को पुनः भर्तियों के लिए इंटरव्यू दो सत्रों में हुआ।
यहां यह भी बताना जरूरी है की मदरसा अंजुमन इस्लामिया में नियुक्ति के लिए बने इंटरव्यू पैनल में मंगलवार को चार व्यक्ति शामिल थे। चर्चा ये भी है इंटरव्यू पैनल में एक ऐसा व्यक्ति को भी रखा गया है जिसकी शैक्षिक योग्यता सवालों के घेरे में है। साथ ही यह भी चर्चा है कि 11 नियुक्तियों की इस खुली लूट में गोरखपुर के अलावा लखनऊ के भी कुछ अधिकारी शामिल है।
इस सम्बंध में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कमलेश कुमार मौर्या ने बताया कि पत्रावली प्रस्तुत किये जाने के पहले नियक्तियों के संदर्भ में नियमावली में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को कोई अधिकार नही है।
बहरहाल योगी सरकार पर मुस्लिम हितों की अनदेखी और मदरसा टीचरों के साथ सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगाने वाले लोग और संगठन इस खुली लूट पर खामोश।