काशी के गंगा तट उस पार एकनाथ भागवत पारायण पाठ का आयोजन प्रारंभ हुआ।

वाराणसी। देवाधिदेव महादेव जी की काशी नगरी धर्म और अध्यात्म के नाम से जानी जाती है।क्योंकि काशी नगरी में भगवान भोलेनाथ का भव्य मंदिर है।जिसको लोग बाबा विश्वनाथ जी के नाम से पुकारते रहते है। शास्त्रों में भी वर्णन है कि काशी नगरी के भूमि पर बड़े बड़े देवी,देवता और ऋषि,मुनियों ने आकर महादेव जी का आशीर्वाद लिया।वही हमारे साधु संतो ने भी काशी नगरी में आकर काशी का मान सम्मान बढ़ाते रहे। बाबा विश्वनाथ जी की नगरी काशी के पड़ाव स्थित डोमरी के जनार्दन स्वामी आश्रम में बुधवार से दस दिवसीय एकनाथ भागवत पारायण कथा प्रारंभ हो गया है।इस कथा का आयोजन भगवान श्री कुंडलेश्वर तीर्थ यात्रा सेवा समिति श्री क्षेत्र कुंडलेश्वर बेड़ी तहसील व जिला जलगांव महाराष्ट्र की ओर से आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्घाटन गुरुवरीया भरत जी महाराज पाटिल के अधिपत्य में किया गया।वही कार्यक्रम का संचालन डा राकेश त्रिवेदी भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष के कर कमलों से शुरू किया गया। एकनाथ भागवत पारायण कथा के प्रारंभ में पहले सुबह चार बजे काकडा आरती से शुरू हुआ। इसके तत्पश्चात विष्णु सहस्त्रनाम पाठ एकनाथ भागवत पारायण पाठ,हरी पाठ हरी कीर्तन का भव्य आयोजन किया गया। एकनाथ भागवत पारायण पाठ कार्यक्रम के दौरान पारायण वाचकों को एकनाथ भागवत ग्रंथ श्रीमती रक्षा ताई निखिल खडशे सांसद रावेद लोकसभा महाराष्ट्र के द्वारा वितरण किया गया।आज के भव्य एकनाथ भागवत पारायण पाठ कथा के दौरान महाराष्ट्र के वार्करी संप्रदाय के अनुसार कई कार्यक्रमों का आयोजन बड़ी धूमधाम के साथ संपन्न हुआ।कई महान विद्वान लोग बताते है कि लगभग 450 वर्षों पूर्व एकनाथ महराज काशी के मनिकर्णिका घाट पर एकनाथ भागवत कथा का पुस्तक अपने कर कमलों से लिखा था।जिसे आज इस कार्यक्रम के दौरान आए हुए लगभग दो हजार की संख्या में पुरुष एवं महिलाएं पढ़कर अपने आप को धन्य मानती हुई नजर आई।कार्यक्रम के दौरान हजारों की संख्या में महाराष्ट्र से आए हुए श्रद्धालु गण एकनाथ भागवत पारायण पाठ कथा सुनकर प्रसन्न दिखाई दे रहे हैं।