गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार देना बाबा साहब का अपमान होगा,

गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार देना बाबा साहब का अपमान होगा,

कांग्रेसियों ने महामहिम राष्ट्रपति को लिखा पत्र ।।

वाराणसी. उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के आवाहन पर आज पूरे प्रदेश में जिला अधिकारी महोदय के द्वारा राष्ट्रपति महोदय को ज्ञापन भेजने का कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इसी क्रम में आज वाराणसी में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के महासचिव हसन मेहंदी कब्बन एवं महानगर कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग की ओर से जिलाधिकारी वाराणसी के माध्यम से जिला के अनुपस्थिति में एस डी एम राजातालाब को ज्ञापन सौंपा महामहिम राष्ट्रपति महोदय को पत्र भेजा गया।
पत्र में उल्लेख किया गया कि केंद्र सरकार ने गीता प्रेस प्रकाशन को वर्ष 2021 का गांधी शांति पुरस्कार देने का निर्णय लिया है,
जब कि गीता प्रेस प्रकाशन से संबद्ध पत्रिका कल्याण में बाबा साहब अंबेडकर जी पर जातिगत टिप्पणी करते हुए लिखा गया, हिनवर्ण निचली जाति के होते हुए उन्होंने ने बुढ़ापे में एक ब्राह्मण महिला से शादी की और हिंदू कोड बिल पेश किया।
पत्र में कहा गया कि जून 1940 पेज no 10–13 इसके अलावा भी अन्य बहुत से अवसरों पर इस प्रकाशन से ऐसी ही जातिगत टिप्पणियां वाले विचार प्रकाशित होते रहे, जो संविधान प्रदत समानता की मूल भावना के विपरीत है।
पत्र के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति महोदय से विनम्र निवेदन किया गया है कि बाबा साहब को अपमानित करने और संविधान के मूल्यों के विपरीत आचरण करने वाले प्रकाशन को गांधी शांति पुरस्कार देने सरकार के निर्णय पर अपनी आपत्ति के साथ हस्तक्षेप करें।क्यों की गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार देने से बाबा साहब का अपमान होगा। प्रतिनिधिमंडल में हसन मेंहदी कब्बन, नईम अहमद, आशीष सिंह विक्की,आफाक हुसैन शान एडवोकेट, ,तौफिक कुरेशी मेंहदी हसन आब्दी,अब्दुल हमीद डोडे जुबैर खान बागी सहित दर्जनों लोग रहे।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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