
आदिवासी विभाग ने ट्राइबल एरिया में सालों पहले स्कूल खोल तो दिया ,लेकिन इन आदिवासियों के बच्चों को पढाने वालें शिक्षक नहीं है शिक्षकों की पोस्टिंग तो होती है लेकिन शिक्षक राजनेताओं एंव आदिवासी विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत कर पुनः दुसरी जगह अटैचमेंट करा लेते हैं आखिर ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षक क्यों नहीं रोक पा रहे हैं,आज जिलें के आदिवासी अंचलों के कई स्कूलों में अतिथि शिक्षक ,एंव शिक्षक विहीन शाला में पढने के लिए मजबूर है आदिवासियों के बच्चे
छिदंवाडा(पंचायत दिशा समाचार)स्कूली शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लाख दावे किए जाए पर जमीनी हकीकत कुछ और है। माध्यमिक शिक्षा मंडल के बोर्ड परीक्षा परिणाम अच्छे लाने के लिए कलेक्टर से लेकर आदिवासी विभाग,जिला शिक्षा विभाग के तमाम अधिकारी जुटे हैं, रोजान बैठकें हो रही है, दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। मगर एक तरफ तामिया, हर्रई बिछुआ ,जुन्नारदेव, जनपद का आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के स्कूल अधिकारियों के तमाम प्रयासों को धता बता रहा है, क्योंकि आदिवासी विभाग एंव स्कूल शिक्षा विभाग ने पहली क्लास से लेकर 10वीं तक स्कूल तो खोल दिया लेकिन शिक्षकों की नियुक्ति तो कर दिया लेकिन राजनेताओं एंव आदिवासी विभाग के अधिकारियों से मिलीभगत कर शहरी क्षेत्र में अटैचमेंट करा लेते है। जिसके कारण आदिवासी क्षेत्र में आज भी सेंकडों स्कूलों में शिक्षक विहीन शाला है जंहा बिना शिक्षक के आदिवासियों के भबिष्य कैसे उज्जवल होगा , विभागीय अधिकारी भूल कैसे जातें है कि इन्हीं आदिवासी बच्चों के कारण उनके बच्चों आज बडे बडे प्राईवेट स्कूलों में पढ पा रहे है ।आदिवासी अंचल में स्थिति ऐसी है कि स्कूल में अध्यनरत सैकड़ों विद्यार्थियों को सिर्फ एक शिक्षक या अतिथि शिक्षक पढ़ा रहे है अब ऐसे में मंडल के बोर्ड परीक्षा परिणाम कहां से बेहतर आएंगे ये सवाल बना हुआ है। हैरानी की बात यह है कि आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों में इतनी संख्या में दर्ज विद्यार्थी खुद ही पढ़ाई करते हैं क्योंकि क्षेत्र में अतिथि शिक्षकों का टोटा है।
स्कूल में आदिवासी और गरीब तबके विद्यार्थी अध्यनरत, जिन्हें सिर्फ स्कूल आने से मतलब है ऐसा लगता है।आदिवासियों ने कई बार प्रदेश के मुख्यमंत्री से शिकायत कर चूके है लेकिन जिलें में बैठे भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी इन आदिवासियों के बच्चों का भबिष्य बर्बाद होने के लिए छोड़ दिए हैं।जबकि इसकी जानकारी सहायक आयुक्त से लेकर कलेक्टर महोदय एंव जिला शिक्षा अधिकारी से लेकर जनजातीय कार्यविभाग के मुख्यालय भोपाल तक में इसकी जानकारी है
आदिवासी क्षेत्र के स्कूलों में कई सालों से अंग्रेजी ,गणित के शिक्षक तक नहीं है,ना ही अतिथि शिक्षक है इन बच्चों को पढने के लिए जिसके कारण आदिवासियों के बच्चों फेल होते हैं और वो आगें की पढाई नहीं कर पाते
जिसके कारण सरकार के तमाम दावे फेल होते नजर आ रहे हैं*