संपादक सुरेश चंद गुप्ता की हत्या की कहानी उनकी पुण्यतिथि पर

संपादक सुरेश चंद गुप्ता की हत्या की कहानी उनकी पुण्यतिथि पर

– पुलिस और गुंडों ने मिलकर लाठियों से पीट-पीट कर बीच चौराहे में हत्या कर दी थी

– बाँदा बंद से भारत बंद तक हो गया था

बांदा
बबेरू कस्बे मे 13 जुलाई 1983 को दिन दहाड़े सरेआम दैनिक “मध्य युग” के संपादक सुरेश चन्द्र गुप्त की हत्या कर दी गई थी। पुलिस और अपराधियों के गठजोड़ से इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। इस निर्मम हत्याकांड से पूरा देश उबल पड़ा था। देश भर के पत्रकारों के आन्दोलन को अकल्पनीय जन समर्थन मिला। बाँदा बंद से भारत बंद तक हो गया।
अंततः बबेरू के दरोगा अरुण कुमार शुक्ला को आजीवन कारावास की सजा हुई। उल्लेखनीय बात यह रही कि जेल में बंद दरोगा को सजा सुनाए जाने के दिन तक एक दिन की भी जमानत या पैरोल नही मिली, जबकि उसके परिवार की पहुंच तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी तक थी।
उस समय “मध्य युग” अखबार अपनी सच्चाई और निर्भीकता के लिए चर्चित था। इसीलिए इतना बड़ा देशव्यापी जन आन्दोलन खड़ा हुआ कि सरकारें हिल गयीं। जन आक्रोश का आलम यह था कि शहीद सुरेश चन्द्र गुप्ता के परिवार को सान्त्वना देने आए मुख्य मंत्री श्री श्रीपति मिश्रा के हेलीकाप्टर पर जनता ने हमला बोल दिया और उसे बुरी तरह तोड़ फोड़ दिया और पुलिस मूक दर्शक बनी रही, क्योंकि पूरा आन्दोलन पुलिस के खिलाफ ही तो था। बाँदा के एस पी को उन्ही के बंगले मे कैद कर लिया और उनको बंधक बना लिया। झाँसी से आये डी आई जी श्री प्रकाश सिंह से जनता की सीधी मुठभेड़ हो गयी। दरोगा की गिरफ्तारी तक आन्दोलन उग्रतम रूप मे रहा। फिर अंतिम अदालत तक डटकर पैरवी होती रही और अपराधियों को सजा मिली ~ जिसने एक इतिहास रच दिया। आज बबेरु में शहीद सुरेश चंद्र गुप्त की पुण्यतिथि मनाई गई,  स्मारक पर हवन पूजन हुआ, प्रतिमा पर फूल मालाएं पहनाकर श्रधांजलि दी गई।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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