
जब बीच बैठक में ‘भिड़’ गए केजरीवाल और खरगे, रेफरी बन ममता ने क्यों चाय-बिस्किट पर बैठने को कहा ?
बैठक से पहले और बैठक के दौरान भी सीएम केजरीवाल यह चाह रहे थे कि कांग्रेस अध्यादेश को लेकर अपना स्टैंड क्लियर करे। हालांकि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर अभी कुछ भी कहने से परहेज कर रही है।
शुक्रवार को पटना में दिनभर सियासी चहलकदमी बनी रही। देश भर के 30 से अधिक विपक्षी दलों के नेता बिहार की राजधानी पहुंचे थे। सूबे के सीएम नीतीश कुमार के घर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विरोधी दलों का महाजुटान हुआ था। कुल 15 विपक्षी दलों को न्योता भेजा गया था। बैठक का एजेंडा साल 2024 के लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी को टक्कर देने को लेकर प्लान बनाना था। लेकिन बैठक के बीच ही दो बड़े नेता आपस में ‘भिड़’ गए। दोनों नेताओं को शांत कराने के लिए वेस्ट बंगाल की सीएम ममता बनर्जी रेफरी बनकर उतरी।
जब ‘भिड़’ गए दो बड़े नेता
दरअसल, सीएम नीतीश कुमार की मेजबानी में विपक्षी एकता की बैठक हुई थी। बैठक में आम आदमी पार्टी (AAP) सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल भी शामिल हुए। गौरतलब है कि बैठक से ठीक पहले AAP ने यह दावा किया था कि अध्यादेश वाले मुद्दे को लेकर कांग्रेस और भाजपा में डील हुई है। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने AAP के इस आरोप को लेकर भारी नाराजगी जताई। इसी बात को लेकर सीएम केजरीवाल और खड़गे में नोकझोंक हो गई। विवाद बढ़ता देख ममता बनर्जी बीच-बचाव के लिए आईं।
रेफरी बनकर उतरी ममता
सूत्रों के मुताबिक, सीएम ममता बनर्जी ने केजरीवाल को इस मुद्दे को लेकर संयम बरतने को कहा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने यह साफ कर दिया है कि वह इस मुद्दे को लेकर संसद सत्र शुरू होने से पहले अपना स्टैंड लेगा। वहीं तमाम दूसरों दलों ने भी यह कहा कि बैठक में अध्यादेश को लेकर कांग्रेस पर दबाव बनाना ठीक नहीं है। गौरतलब है कि करीब एक महीने से सीएम केजरीवाल ट्रांसफर-पोस्टिंग वाले अध्यादेश को लेकर कांग्रेस का सपोर्ट मांग रहे हैं। अब तक कुल 11 दलों ने AAP के समर्थन का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस की चुप्पी को लेकर केजरीवाल की पार्टी खासा नाराज दिख रही है।
चाय-बिस्किट पर बैठने की सलाह
बैठक से पहले और बैठक के दौरान भी सीएम केजरीवाल यह चाह रहे थे कि कांग्रेस अध्यादेश को लेकर अपना स्टैंड क्लियर करे। हालांकि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर अभी कुछ भी कहने से परहेज कर रही है। जब बैठक के बीच में खरगे और केजरीवाल के बीच नोकझोंक हुई तब ममता ने दोनों नेताओं को एक सलाह भी दी। सूत्रों के मुताबिक, सीएम ममता ने कांग्रेस और AAP के नेताओं को चाय-बिस्किट पर बैठकर अपने सभी मतभेदों को दूर करने को कहा।
गौरतलब है कि बैठक खत्म होने के बाद सीएम नीतीश ने कहा कि सभी दल 2024 का चुनाव एक साथ मिलकर लड़ेंगे। हालांकि जिस प्रेस कॉन्फ्रेंस में नीतीश कुमार ने यह बात कही वहां सीएम केजरीवाल मौजूद नहीं थे। बैठक खत्म होते ही वह दिल्ली के लिए निकल गए। वहीं AAP ने एक बयान जारी कर अपनी नाराजगी भी जाहिर कर दी। बयान में कांग्रेस की चुप्पी को लेकर सख्त सवाल पूछे गए। केजरीवाल की पार्टी ने कांग्रेस से पीएम मोदी और दिल्ली की जनता में से किसी एक को चुनने को कहा। राजनीतिक जानकारों का यह कहना है कि कांग्रेस अध्यादेश वाले मुद्दे पर इसलिए चुप है क्योंकि पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता यह नहीं चाहते हैं कि AAP का सपोर्ट किया जाए। ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस आगे क्या करती है। क्या वो विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए केजरीवाल का सपोर्ट करेगी या वह इस मुद्दे से खुद को दूर ही रखेगी?