छोटे कर्मचारी से लेकर बड़े कर्मचारी तक को परेशान किया जाता है

सीएचसी बागवाला पर तैनात मैडम नीतू *एमओआईसी का बड़ा खेल, रिपोर्ट योगेश मुदगल

एटा। छोटे कर्मचारी से लेकर बड़े कर्मचारी तक को परेशान किया जाता है

बागवाला एमओआईसी मैडम नीतू से परेशान है पूरा स्टाफ जबकि उनका पति स्वास्थ्य विभाग में नौकरी नहीं करता है फिर भी सरकारी गाड़ी में बैठकर अपनी स्टाफ पर पूरी धौस जमता है। जहाँ कहानी उलटी है जब सैया भये कोतवाल डर काहेका..!

जहाँ जितने भी सरकारी टेंडर होते है उनकी देख बहाल उनका पति जिसको लोग वकील नाम से जानते हैं मेडिकल बनवाने से लेकर हर काम का रेट अलग-अलग बताता हैं मैडम के कहने पर स्टाफ को दिखाता है खौफ दिखाकर मैडम के नाम पर बहार ही बाहर पैसो का खेल करता है उनका पति वकील नाम से चर्चित है जो खुलेआम अपनी घरवाली के इशारों पर महीने भर में लाखों का खेल खेल रहा है। आखिर विभाग में इस फर्जी वकील पर किसका हाथ है।

वही सीएमओ ऑफिस में गाड़ियों का टेंडर टैक्सी पास परिमट पर होता है लेकिन वहीं बागवाला में बिना टैक्सी परमिट और टेंडर की गाड़ियाँ लगी हुई है जो क्षेत्र में भर्राटा काट रही है वह कैसे चल रही है। सीधा साधा जबाव है की राजस्व की खुलेआम चोरी की जा रही है जिनका धन बड़ा चढ़ा कर दिखा कर निकाला जाता है। और तो और डिलीवरी वाली महिलाओं को कभी भी खाना नहीं दिया जाता है क्योकि महिलाओं के परिवार वाले अपने घर से ही खाना मंगवाते है क्योकि यहां खाने के लिए उनसे कहा जाता है कि आप लोग खाना घर से मगा लेना। मरीज या प्रसूतिका चार भर्ती है भोजन का भुगतान तीमार दार सहित हो जाता है। एमओआईसी की देखरेख में चलती है गाड़ियां बागवाला सीएससी पर कुछ दिन पहले एक मंदिर का निर्माण हुआ था जिसमें एमओआईसी नीतू छोटे से बड़े वर्कर से चंदा इकट्ठा किया गया था जबकि उसमें लगा था उससे भी ज्यादा इकट्ठा कर दिया और बहुत सारा सारा पैसा मैडम कर गई हजम..? बागवाला सीएचसी पर बड़े-बड़े खेल हो रहे है। विभाग के आला अधिकारी तीज त्योहारों पर मेडम से मिठाई खाकर ही मुंह पोछ लेते है और मेडम की पीठ थपथपा देते है। इससे साफ जाहिर होता है की मेडम अपनी बीसों उँगलियाँ घी में और सर कड़ाही में डाल कर तैर रही है। दर्जनों कर्मचारी इनके संरक्षण में बढ़- पल रहे है। दर्जनों अधिनस्त कर्मचारी महीना दारी कमीशन देकर छुट्टियां मनाते है सैकड़ा के आसपास सीएचसी पर तैनात स्वास्थ्यकर्मियों की फर्जी उपस्थिति दर्ज की जाती है। अगर यहाँ अलीगढ़ या लखनऊ की टीम अचानक छापा मारे तो सब गोलमाल सामने आ जायेगा। कहावत है ऊँट की चोरी नोहरे नोहरे कब तक..?

आखिर ऐसे भृष्ट और कमीशन खोर अधिकारियों पर कब होगी कार्रवाई..! जहां प्याज के छिलकों की तरह कदम कदम पर भृष्टाचार कुलांचे मार रहा है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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