हिंदू राष्ट्र के लिए धर्म की जागृति आवश्यक – स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती।

स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती अखिल भारतीय सनातन समिति जैतपुरा वाराणसी द्वारा आयोजित संगीतमय रामकथा के पांचवें दिवस सोमवार की रात्रि में अपने विचार व्यक्त करते हुए देश के प्रमुख संत पूज्य स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि भारत को जल्द से जल्द हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए धार्मिक आयोजन सदैव होते रहना चाहिए ताकि प्रदेश सनातन धर्म पर सदैव चलता रहा है और रहेगा।
इसके पश्चात रामकथा के इस अवसर पर पूज्य संत बालक दास जी महाराज ने प्रवचन में अपने बताया कि जब राजा जनक द्वारा मिथिला में आयोजित सीता स्वयंवर का सस्नेह निमंत्रण जब गुरु विश्वामित्र को प्राप्त हुआ, तब उन्होंने उसे सहर्ष स्वीकार करते हुए दोनों अयोध्या नरेश राजा दशरथ के राजकुमारो को लेकर वह स्वयंवर में पहुंचे तब राजा जनक ने उन्हें यथा योग्य सम्मान देकर सिंहासन पर बैठाया। इसके पश्चात उन्होंने दोनों भाइयों का परिचय भी पूछा तब महर्षि विश्वामित्र ने राजा दशरथ के पुत्र होने के की बात बताई वहां दोनों भाइयों के सौंदर्य को देखकर मिथिला के नर नारी काफी सम्मोहित होकर विधाता से यह अर्जी लगा रहे थे। यह वर जिन जानकी के यथा योग्य होगा दूसरी तरफ जानकी जी की सहेलियां बारंबार यही चाहती थी कि इनके दर्शन हम सभी को विवाह के बाद हमेशा मिलते रहेंगे। देश – देश के भट्ट मानी राजा शिव जी के धनुष को तोड़ने की बात तो छोड़िए, वह उसे हिला भी नहीं सके तब राजा जनक ने यह देखकर उन्होंने कहा इस समस्त राजा अपने अपने निज नगर को चले जाएं।लगता है कि पृथ्वी वीरों से खाली है यह जानकर शुभ घड़ी में गुरु विश्वामित्र ने प्रभु श्रीराम से धनुष तोड़ने की आज्ञा दी। प्रभु मुनि की आज्ञा पाकर उसे शहर में ही धनुष को जब तोड़ा पूरा समाज उनकी जय-जयकार करने लगा शुभ घड़ी में धनुष तोड़ने की सूचना पर मुनिवर परशुराम जी तमतमाए आते हुए स्वयंवर स्थल पर पहुंचे।
अंत में व्यासपीठ की आरती ज्ञानचंद मौर्य भैया लाल जायसवाल विष्णु गुप्ता डॉ अजय जायसवाल बनारसी अग्रहरि मदन यादव प्रमोद यादव सुजीत कुमार रवि प्रकाश छेदीलाल मुन्नूलाल राजेंद्र कुमार अभय स्वाभिमानी ने की।
मंच का संचालन प्रधान सचिव राजेश सेठ ने किया।