दिशा सोसाइटी किसी भी प्राकृतिक आपदा के समय जात-पात से ऊपर उठकर समाज की सेवा करने वाली संस्था है।

स्वयं को दर्द होने पर तो जानवर भी चिल्लाता है पर असली इंसान वही है जो दूसरों के दर्द को महसूस करें और उसके निवारण का हर संभव प्रयास करें हमारे आसपास ऐसे बहुत से समाजसेवी हैं जो निरंतर किसी ना किसी रूप में समाज की सेवा करते रहते हैं तथा कुछ तथाकथित समाजसेवी बड़े-बड़े एनजीओ बनाकर समाज सेवा के नाम पर धन उगाही भी करते हैं। जिसके परिणास्वरूप जो सही में निस्वार्थ समाजसेवा करते हैं उन्हें भी संदेह की नजर से देखा जाता है परन्तु सच्चे समाजसेवक इन बातों की परवाह किए बगैर निरंतर समाज को अपना योगदान देते रहते हैं।
ऐसे ही एक निस्वार्थ समाज सेवी हैं वाराणसी के रहने वाले अजीत पांडे बाबुल जिनको की समाज सेवा के क्षेत्र का शायद ही कोई प्रतिष्ठित सम्मान हो जो ना प्राप्त हो।
पांडे द्वारा की जाने वाली निस्वार्थ समाज सेवा हमारे लिए एक उदाहरण है पांडे के नेतृत्व में अभी हाल ही में कोरोना काल के समय पूरे 1 महीने तक लगभग 200 मरीजों को दोनों टाइम भोजन की व्यवस्था की गई थी जिसकी खबर सभी समाचार पत्रों में प्रमुखता से छपी भीषण ठंड में जरूरतमंदों के बीच गांव-गांव घूमकर गर्म कपड़े बांटना हो या चिल्लाती धूप में लोगों के पानी पीने की प्याऊ व्यवस्था हो दिन-रात की परवाह किए बगैर तुरंत समाज सेवा के कार्यों में जुट जाते हैं वृद्ध आश्रम में अनाथालय में तथा गरीब व मलिन बस्तियों में जरूरतमंदों को खाना-पीना कपड़े दवाइयां से लेकर बच्चों के लिए कॉपी किताब खिलौने इत्यादि उपलब्ध कराते हैं। आर्थिक रूप से बहुत कमजोर छात्रो की शिक्षा का पूरा खर्च उठाया जाता है वर्तमान में लगभग 25 से 30 विद्यार्थी इस श्रेणी में है जिनकी पढ़ाई लिखाई का खर्च अजीत पांडे बाबुल के नेतृत्व में उठाया जा रहा है
इन्हीं सब समाज सेवा के कार्यों को देखते हुए बाबुल जी को लगभग समाज सेवा के क्षेत्र में सभी प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं जिनमें काशी विभूषण रत्न उत्तर प्रदेश रत्न अलंकार यूपी गौरव अलंकरण पूर्वांचल शिरोमणि सम्मान इत्यादि प्रमुख हैं।
आज से एक दशक पहले अजीत पांडे बाबुल ने समाज सेवा के उद्देश्य से दिशा सोसाइटी नामक सामाजिक आध्यात्मिक संस्था की नींव रखी दिशा सोसाइटी किसी भी प्राकृतिक आपदा के समय जात पात से ऊपर उठकर समाजसेवा करने वाली संस्था है दिशा सोसाइटी द्वारा भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने की लिए भव्य सांस्कृतिक समारोह तथा लोगो को अध्यात्म से जोड़ने के लिए भागवत कथा, शिव पुराण तथा कृष्ण लीलाओं का आयोजन किया जाता है जिससे कि समाज के लोग मानसिक रूप से स्वस्थ हो कर उत्तम सोच के साथ जनमानस के सुख दुःख में भागीदारी कर सके
दिशा सोसाइटी के संदर्भ में बाबुल जी बताते है कि
हम जिस समाज में रहते हैं वहां हमारा दायित्व होता है कि हम समाज के लिए कुछ निस्वार्थ सेवा का भाव रखें
तथा अपने आसपास जो भी जरूरतमंद दिखे उसकी जरूरत को पूरा करने का हर संभव प्रयास करें आज के समय में समाजसेवी दिखना सब चाहते हैं पर निस्वार्थ समाजसेवा करना कोई नहीं चाहता है अच्छा दिखना चाहते हैं पर अच्छा कार्य करना नहीं चाहते हैं ऐसे तथाकथित समाजसेवियों को एक ही संदेश देना चाहता हूं कि ऊपर वाला सब देखता है कि आप किस भाव से क्या सेवा करते हैं अतः सच्चे इंसान होने का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए समाज में कुछ ना कुछ परोपकार के कार्य करते रहना चाहिए जिससे कि हमारे भीतर असीम आत्मसंतुष्टि का भाव जागृत होता है।