
महाकवि रसखान जी की समाधि महावन मथुरा ।
1533 ई में दिल्ली में मुसलमान पठान परिवार में
जन्मे ये महाकवि अपने युवा काल में हुमायूं के शाषनकाल में दिल्ली की अराजकता दुर्व्यवस्था से
परेशान होकर ब्रजमण्डल में आ गये ।
यहां की रज में व्याप्त कृष्ण भक्ति रस प्रवणता से , कृष्ण कथा के माधुर्य से इतने प्रभावित हुए कि 1577 ई श्री बल्लभाचार्य जी से दीक्षा लेकर कृष्ण भक्ति में आकण्ठ
डूबकर आनन्दित होकर कृष्णलीला पर
सवैया दोहे बनाकर स्थान स्थान पर गाने लगे । उन्हें श्री कृष्ण जी के श्रीनाथ जी स्वरूप के दर्शन भी हुए ।
उनकी भक्ति के उत्कर्ष भाव के कारण
उन्हें वैष्णव वार्ता में 252 प्रमुख भक्तों महात्माओं सन्तों में स्थान मिला ।
उनकी मूर्ति के सन्निकट होने मात्र से मन में दिव्यता की तरंगें उठती हैं और जो
बहाकर कान्हा के सानिध्य में बिठा देती हैं—- शत शत नमन