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जनसुनवाई उपभोक्ता परिषद ने रखी बात
यूपी में हर साल 5019 करोड़ की होती है बिजली चोरी
मध्यांचल चाहता है 16 फीसदी बढ़ाई जाएं बिजली की दरें
लखनऊ, प्रमुख संवाददाता। शुक्रवार को नियामक आयोग में बिजली दरों पर हुई जनसुनवाई के दौरान उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने बताया कि कि पूरे प्रदेश में हर साल 5019 करोड़ रुपये की बिजली चोरी से जलाई जाती है। देश के पांच सबसे अधिक बिजली दर वाले राज्यों में दुकानदारों (कामर्शियल) की बिजली यूपी में सबसे मंहगी है। इसे कम किए जाने की जरूरत है।
किसानों की बिजली दर में 10 फीसदी वृद्धि की बात क्यों की जा रही है जबकि सरकार ने किसानों को फ्री बिजली देने की घोषणा की है। उन्होंने बिजली उपकेंद्रों की खाली भूमि पर कामर्शियल कांप्लेक्स बनाने के फैसले पर भी सवाल उठाया। कहा कि इन खाली जमीनों पर बैटरी बैकअप की व्यवस्था की जाए।
हड़ताल से हुए नुकसान की भरपाई उपभोक्ताओं से ना हो उपभोक्ता परिषद ने कहा कि हड़ताल के दौरान हुए नुकसान का आंकलन जिसे बिजली कंपनियां उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करेंगी, वह रकम उपभोक्ताओं से नहीं वसूली जानी चाहिए। सवाल खड़ा किया कि बिजली कंपनियों में करोड़ों रुपये खर्च कंसल्टेंट रखने के बाद भी रेटिंग गिरने का कारण क्या है? उपभोक्ताओं को मुआवजा कानून का लाभ अभी क्यों नहीं दिया जा रहा है?
पांच साल तक सात फीसदी की दर से कम की जाएं बिजली दरें अवधेश वर्मा ने कहा कि बिजली दरों में 18 से 23 फीसदी वृद्धि का प्रस्ताव ही गलत है। जब बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का 25133 करोड़ रुपये निकल रहा है, ऐसे में अगले पांच सालों तक बिजली दरों में सात फीसदी सालाना की दर से कमी की जानी चाहिए।