भारतीय ज्ञान परंपरा अद्वितीय ज्ञान और प्रज्ञा का प्रतीक है- प्रो.के.के.सिंह।

आज दिनांक 18 अप्रैल 2023 को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ सभागार में पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध एवं छात्र कल्याण संकाय के संयुक्त तत्वाधान में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी जिसका विषय राष्ट्र निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका संपन्न हुई जिसमें मुख्य अतिथि डॉ अभिषेक प्रताप सिंह व विशिष्ट अतिथि डॉ मोनिका गुप्ता डॉ विमल नयन पाण्डे डॉ अवधेश सिंह का स्वागत छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो.के.के.सिंह व ऊर्जस्विता सिंह ने अंगवस्त्र व पुष्पगुच्छ देकर किया, कार्यक्रम का शुप्रारंभ प्रो.के.के.सिंह द्वारा स्वागत भाषण के साथ किया गया। मुख्य अतिथि ने अपने उद्बोधन में बताया कि ज्ञान परंपरा मस्तिष्क को खोलती है ज्ञान की प्रकृति सदैव सकारात्मक होनी चाहिए उन्होंने बताया कि कौटिल्य की विचारधारा से हमें प्रेरित होकर राष्ट्र निर्माण में सहयोग करना चाहिए राष्ट्र निर्माण में सेना का सशक्तिकरण होना अति आवश्यक है विशिष्ट अतिथि डॉ मोनिका गुप्ता ने अपने उद्बोधन में स्त्रीधन व दहेज पर प्रकाश डालते हुए बताया कि स्त्रीधन महिलाओं के हितार्थ विधिक रुप से सही है जबकि दहेज अंग्रेजों के जमाने का कंसेप्ट है जो बिल्कुल ही गलत है प्रो.के.के.सिंह ने अपने उद्बोधन में बताया कि राष्ट्र भू–सांस्कृतिक अवधारणा है इसके निर्माण में आर्थिक समृद्धि सामाजिक समरसता राजनीतिक संप्रभुता एवं इसके साथ साथ जीवन मूल्यों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होनी चाहिए पंडित दीनदयाल के अनुसार राष्ट्र एक जीवित पुरुष है सभी लोगों की सामूहिक आत्मा ही राष्ट्र की आत्मा है ,अपने उद्बोधन में यह भी बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा जो वैदिक एवं उपनिषद काल में भी व बौद्ध और जैन काल में भी रही है और भारत इसको हमेशा संजोया रहता है विभिन्न विश्वविद्यालयों की स्थापना और शिक्षा व्यवस्था से स्पष्ट परिलक्षित होता है लेकिन इसका लोप विगत 200 से 300 वर्षों में हुआ है राष्ट्रीय रूपरेखा में इसे भी उचित रूप से प्रतिबिंबित करने की आवश्यकता है प्रोफेसर के.के सिंह ने अपने उद्बोधन में बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा अद्वितीय ज्ञान और प्रज्ञा का प्रतीक है जिसमें ज्ञान और विज्ञान लौकिक और पारलौकिक कर्म और धर्म तथा भोग और त्याग का अद्भुत समन्वय है कार्यक्रम में प्रो नंदिनी सिंह, प्रो शेफाली ठकराल प्रो अनुकूल राय डॉ निशा सिंह डॉ चंद्रशेखर सिंह डॉ नीरज धनकड़ डॉ धनंजय शर्मा डॉ ध्यानेंद्र मिश्रा डॉ अनीता डॉ निशा सिंह डॉ अनिल कुमार डा सतीश कुशवाहा डॉ प्रतिभा सिंह डॉ कंचन शुक्ला सहित काफी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं कर्मचारी गण उपस्थित रहे कार्यक्रम का संचालन डॉ डॉक्टर उर्जस्विता सिंह ने किया।