क्या आतंकियों पर मानवीय सम्बेदना होनी चाहिये

क्या आतंकियों पर मानवीय सम्बेदना होनी चाहिये?, जो लोगों को गाजर मूली की तरह काटता हो

दुर्दांत अपराधी अतीक अहमद की हत्या का समर्थन क्यों नहीं करना चाहिए? वरना, उसे भी अफजल गुरु या कसाब की तरह जेल में पालना पड़ता। प्रयागराज की घटना एक तरह से बाकी सभी राज्यों के लिए सबक है। हम भले ही ‘जैसे को तैसा’ वाली नीति नहीं अपना सकते, लेकिन अपराधियों को तुरंत सजा जरूर दे सकते हैं, और जब न्यायालयों पर मुकदमों का भार अधिक हो, तब आक्रोशवश ऐसी घटनाएं अंजाम दे दी जाती हैं। जब सबको अतीक के गुनाहों का पता है, तब उसे जेल में रखने से क्या फायदा होता? सिर्फ और सिर्फ प्रशासन का कीमती समय बर्बाद होता। अतीक को यदि नहीं मारा जाता, तो पुलिस और अदालतें उसके पीछे अपना कीमती वक्त बर्बाद करती रहतीं। इस घटना से अपराधियों में खौफ पैदा होगा और अपराध मुक्त समाज की राह प्रशस्त होगी।
अत्याचारियों का हश्र

भारत भूमि का हमेशा से इतिहास रहा है कि जब भी अत्याचार बढ़ा है, तब उसको समूल नष्ट करने के लिए कोई-न-कोई जरूर आगे आया है, चाहे वह किसी भी रूप में हो। पुरातन काल में रावण और कंस इसके उदाहरण थे, तो आधुनिक युग में विकास दुबे और अतीक अहमद जैसे अपराधी। इन सभी आतताइयों का अंत जरूर हुआ। आज जिस प्रकार का अत्याचार अतीक अहमद कर रहा था, उसका हिसाब होना ही था। उसने लगभग चार दशकों तक प्रयागराज पर अपना साम्राज्य बनाए रखा और उसी नगर में उसे गोलियों से भून भी दिया गया। संगमनगरी में उसने जिस तरह से दूसरों की जमीनों, घरों पर कब्जा किया, कितने लोगों को मौत के घाट उतारकर उनके परिजनों को अंतहीन पीड़ा दी, इससे यह बताना आसान है कि अतीक अहमद कितना बड़ा अत्याचारी था। देखा जाए, तो अतीक अहमद ने अपराध की जो फसल बोई थी, उसी का नतीजा रहा कि पहले उसका बेटा और फिर वह खुद अपने भाई के साथ मिट्टी में मिल गया।
आतंकियों के हिमायती

जब कोई अतीक या असद के लिए ‘मुसलमान था, इसलिए मार दिया’ का प्रयोग करता है, तो लगता है, वह भूल गया है कि इन दरिंदों ने कितनी बच्चियों का जीवन बिगाड़ा, कितने दर्जन लोगों की सीधी हत्या की और कितने लोगों की भूमि हड़पी। इन दरिंदों के लिए जो भी समर्थन जुटा रहा है, वह आतंकियों का हिमायती है और अतीक के पाप का भागीदार भी।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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