साहित्यकार विनोद द्विवेदी का लघु कथा आखरी व्रत का हुआ विमोचन

वाराणसी | रचना रचनाकार को भी रचती है। विनोद द्विवेदी की लघुकथाओं को पढ़ने पर यह सिद्ध होता है।” यहाँ जानकी नगर स्थित लान के हाल में विनोद द्विवेदी कह के लघुकथा – संकलन आखिरी व्रत का विमोचन करते हुए प्रोठ अवधेश प्रधान, प्रो० वशिष्ठ अनूप ओम धीरज,प्रकाश उदय, प्रो0 कैलाश तिवारी और हिमांशु उपाध्याय ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संग्रह की कहानियाँ अपनी लघुता मैं भी क्षित्र, उत्प्रेरक और जलस्पर्शी हैं। प्रदेश प्रधान ने कहा कि आज के समाज में विसंगतियों और विद्रूपताओं को उकेरते हुए लेखक ने मनुष्य की संवेदनशीलता कडे जाग्रत करने के लिए ऐसी नाटकीय लघुकथाएँ लिखी हैं। यह संग्रह पहनीय और संग्रहणीय
है। द्वितीय सत्र में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें भो अब्बल श्रीवास्तव गिरिथचन्द्र फ ७० डॉ शम्भूनाथ शतरथी, भी गौरी शंकर तिवारी,भोला नाथ विक डॉ জথির सुनील नारायण उपाध्याय, पूर्ण हिमांस उपाध्याय विजय शंकर पाण्डेय,डॉ अशोक द्विवेदी, भी महेन्द्र अलंकार ए. डॉ प्रकाश उदय के काव्य पाठ किया। कवि सम्मेलन कवि सम्मेलन का संचालन डॉ वेद प्रकाश मान्डेम से किया। कविसम्मेलन प्रतिष्ठित नवगीत ओमजीरज की अध्यक्षता में किया गया।