*महंगे होते जेवर बिगाड़ने लगे भारतीय विवाह का बजट, रिपोर्ट योगेश मुदगल

भारत में अनादि काल से विवाह और सोने के गहनों के बीच चोली-दामन का रिश्ता रहा है। गहनों के बिना अपने यहां विवाह अधूरा माना जाता है। इसके प्रमाण हड़प्पा और मोहनजोदड़ो काल के अवशेषों में भी मिले हैं। भारतीय सभ्यता-संस्कृति में सोने की अतुलनीय महत्ता के कारण ही लगन के मौकों पर अरबों-खरबों रुपये के जेवर खरीदे जाते हैं। इसके अलावा, धनतेरस या अक्षय तृतीया जैसे अवसरों पर भी बड़े पैमाने पर सोने के आभूषण खरीदे जाते हैं।
हिंदू धर्म के 16 संस्कारों, अर्थात जन्म से मृत्यु तक में सोने का लेन-देन किया जाता है, तो भारतीय स्त्रियों के लिए सोना महज आभूषण नहीं, बल्कि उनके सुहाग, स्वाभिमान और गौरव का भी प्रतीक है। इसीलिए, वे सोना खरीदती तो हैं, लेकिन शायद ही बेचती हैं। वर्ल्ड गोल्ड कौंसिल (डब्ल्यूजीसी) की मई, 2020 में जारी रिपोर्ट बताती है कि भारतीय महिलाओं के पास लगभग 24 हजार टन सोना है, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा सोने का खजाना कहा जा सकता है। डब्ल्यूजीसी के मुताबिक, भारतीय महिलाएं दुनिया के कुल स्वर्ण भंडार का 11 प्रतिशत हिस्सा आभूषण के रूप में पहनती हैं, जो शीर्ष पांच देशों के कुल सोने के भंडार से अधिक है।
उत्तर भारत के मुकाबले दक्षिण में लोग स्वर्ण के ज्यादा दीवाने हैं। इसी कारण से दक्षिण के राज्यों की देश के कुल गहने की खरीदारी में 40 प्रतिशत की हिस्सेदारी है। इनमें भी अकेले तमिलनाडु की हिस्सेदारी 28 प्रतिशत है। दक्षिण भारत के मंदिरों में भी अकूत सोना जमा है। डब्ल्यूजीसी द्वारा वर्ष 2020 में जारी रिपोर्ट बताती है कि लगभग चार हजार टन से अधिक सोना भारत के मंदिरों में जमा है।
विवाह में अमीर और गरीब सभी अपनी क्षमता के अनुसार सोने के गहने अपनी बेटी को जरूर देते हैं, लेकिन धीरे-धीरे गरीबों के लिए विवाह में बेटी को सोना देना मुश्किल होता जा रहा है, क्योंकि पिछले 17 वर्षों में प्रति 10 ग्राम सोने की कीमत में 620 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 5 मई, 2006 को प्रति 10 ग्राम सोने की कीमत 10,000 रुपये थी, जो 20 मार्च, 2023 को बढ़कर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के साथ 62,000 रुपये के अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गई। यही हाल चांदी का भी है। इसके दाम में भी विगत 17 साल में 317 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वर्ष 2006 में एक किलो चांदी की कीमत जहां 17,405 रुपये थी, जो 30 मार्च, 2023 को बढ़कर 55,180 रुपये हो गई। हालांकि, वर्ष 2020 में इसकी कीमत बढ़कर 63,435 रुपये पर पहुंच गई थी, जो इसका अब तक का उच्चतम स्तर है।
विगत 17 वर्षों में सोने और चांदी धातु की कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि होने की वजह से निम्न और मध्यम वर्ग के विवाह के बजट में बहुत ज्यादा वृद्धि हुई है, लेकिन उनकी आय में 291 प्रतिशत की ही बढ़ोतरी हुई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की मानें, तो साल 2006-07 में भारत में प्रति व्यक्ति सालाना आय 33,717 रुपये थी, जो गत 28 फरवरी को एनएसओ के एक अन्य अनुमान के मुताबिक, 98,118 रुपये आंकी गई थी। हालांकि, यह तुलना बेमानी है, क्योंकि सभी की आय का सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। फिर भी, यह आकलन है कि वर्ष 2006 में जहां एक औसत शादी में पांच से 10 लाख रुपये खर्च किए जा रहे थे, जिसमें गहने पर अमूमन 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा खर्च होता था, वहीं आज विवाह का खर्च बढ़कर 10 से 20 लाख रुपये हो गया है, लेकिन गहने पर होने वाले खर्च का हिस्सा घटता जा रहा है।
ऐसे में, इस साल मई, जून, नवंबर और दिसंबर के शुभ मुहर्तों में विवाह तो होंगे, पर सभी अपनी इच्छानुसार बेटियों को लोग गहने शायद ही दे पाएंगे, क्योंकि अमेरिका व यूरोप में चल रहे बैंकिंग संकट, कई देशों के केंद्रीय बैंकों द्वारा की जा रही सोने की खरीदारी, आगामी महीनों में भी रिजर्व बैंक और फेडरल रिजर्व द्वारा नीतिगत दरों में वृद्धि करने का अनुमान, डॉलर सूचकांक में गिरावट, कर्ज की ब्याज दरों में तेजी, वैश्विक भू-राजनीतिक संकट, रूस व यूक्रेन के बीच जारी जंग और कच्चे तेल की कीमतों के लगातार तेजी रहने से सोने के दाम में अभी और इजाफा होने की आशंका बनी हुई है।