
जिलाधिकारी महोदय एक नजर अवैध क्लीनिकों पर भी।
एटा जनपद में अस्पतालों को चला रही बगैर डिग्री वाली महिलाए।
अल्ट्रासाउंड सेंट्रो पर की जा रही अवैध रूप से भ्रूण जांच।
जनपद में जितने भी प्राइवेट अस्पताल खोलकर बैठे झोलाछाप जो अपने आपको एमबीबीएस डॉक्टर से कम नहीं समझती हैं,किसी भी प्राइवेट हॉस्पिटल का स्वास्थ्य विभाग के दलालों द्वारा रजिस्ट्रेशन करा दिया जाते है,
उस प्राइवेट हॉस्पिटल की सारी जिम्मेदारियां एमडी बना बैठा डॉक्टर हो या महिला डॉक्टर
उस पर स्वयं लागू होती हैं।जिस डॉक्टर के नाम से रजिस्ट्रेशन कराया जाता है,
वह डॉक्टर महीनादारी लेता है, और उस हॉस्पिटल की तरफ मुड़ कर भी नहीं देखता। एमडी बना बैठा एमबीबीएस डॉक्टर कहने वाला क्या सही और क्या गलत कर रहा है,कोई देखने बाला नहीं।
ऐसा ही एटा में एक कारनामा और सामने आया है,उच्चाधिकारी को सबकुछ मालूम होने परभी जानबूझकर अनजान बने बैठे हैं, प्राइवेट हॉस्पिटल चला रही महिलाएं, जो अपने आप को एमबीबीएस डॉक्टर समझती हैं,
आखिरकर यह लोग कैसे बन गए करोड़ों की संपत्ति के मालिक?
करोड़ों की संपत्ति की बात छोड़ो,इनके बच्चे 50-50 लाख रुपए का डोनेशन देकर कर रहे हैं। एमबीबीएस
आखिरकार इन पर इतना पैसा आया कहां से? क्या डिलीवरी में इतना पैसा मिल सकता है,
एसआरए हॉस्पिटल वाली मेल फीमेल का अल्ट्रासाउंड कराते हैं मुंह मांगी रकम में और अगर उसमें मेल दिखता है तो उससे 4000 ₹ से 6000 एक्स्ट्रा ले लेते हैं,और अगर फीमेल होता है, तो अपनी मुंह मांगी रकम लेकर अनजान बच्ची को मौत के घाट उतारवा देते हैं।
इन सभी हॉस्पिटल चला रही डॉक्टर बनी महिलाओं पर संपत्ति चंद दिनों में आई कहां से
इनकी तो जांच कराई जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी अलग अलग हो जाएगा।
अधिकारी तो भ्रम में बैठे हुए हैं।हमें तो पैसे से काम बुढ़ा मरे या जवान।दिनो-दिन हो रही मौतों का जिम्मेदार कौन जिला अधिकारी महोदय इस चीज पर संज्ञान अवश्य लें, आखिरकर अवैध क्लीनिकों, झोलाछाप डॉक्टरों पर इतनी संपत्ति आई कहां से? झोलाछाप डॉक्टर पर शिकोहाबाद रोड के प्रेमनगर और हाजीपुरा जैसे लोगों पर करोड़ों की संपत्ति की मालिक बने बैठे है।
दिन-ब-दिन हो रही मौतें फिर भी नहीं हो रही कोई कार्यवाही
स्वास्थ्य विभाग का जगलर एक पत्रकार जो हमेसा सीएमओ ऑफिस में ही बैठा देखा जा सकता है। और सीएमओ के ऑफिस ही नहीं फल के बंगले तक पहुंचता है ।
जोकि जितने भी प्राइवेट हॉस्पिटल और अल्ट्रासाउंड सेंटर और पैथोलॉजी उन सभी व्यक्ति से चौथ वसूली करके स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों तक पहुंचाता है, मोटी रकम।
जिसमें अपना हिस्सा इसका सुरक्षित रहता है।
स्वास्थ्य विभाग में सुबह-सुबह इस तरह से आता है, कि ऐसा लगता है कि स्वास्थ्य विभाग की उच्च अधिकारी यही है।
और स्वास्थ विभाग के अधिकारियों के ऐसे लोग ही रहते हैं,संपर्क में जो उन्हें मोटी रकम लाकर बंद हॉस्पिटलों को खुलने का काम भी करते हैं,पैसे के अंधकार में अंधे स्वास्थ विभाग के अधिकारी नहीं करते हैं कोई कार्यवाही कार्यवाही करने से पहले इनका एक चमचा दो सभी अस्पतालों से चौथ वसूली लाइनें में माहिर है ।
वह व्यक्ति मोटी रकम लेकर सारा मामला संतोषजनक सेट करने में माहिर है।
और उच्च अधिकारियों को वह पैसा पहुंचाता है, और कार्यवाही रोकने में मदद करता है।
पत्रकारिता की आड़ और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठा देख लोग उसे अधिकारी समझकर उसके पास पहुंच जाते हैं,। और अपने काले कारनामों की करतूत को छुपाने के लिए मोटी रकम दे देते हैं।
ईसीएमओ सर्विस कुमार ने बताया है कि मैं नाम का एसीएमओ हूं कार्यवाही तो पुष्पेंद्र करता है यही हॉस्पिटलों को खुल पाता है यही बंद कर आता है मैं तो सिर्फ कागजों पर साइन करने का काम करता हूं और नाम का अधिकारी हूं जनपद में हाल ही सील हुए दो हॉस्पिटलों को पुष्पेंद्र द्वारा एक ₹100000 लेकर खुलवाया गया
जिला अधिकारी महोदय ऐसे लोगों पर सख्त से सख्त कार्यवाही करने की कृपा करें