पत्रकारिता और राष्ट्रीयता को अलग करना असंभव : कुलपति

पत्रकारिता और राष्ट्रीयता को अलग करना असंभव : कुलपति

पत्रकारिता केवल सूचना मात्र का उपकरण नही : वीरेंद्र आर्य

पत्रकारिता में हमारे सामने अनंत आकाश की संभावना : शलभ मणि त्रिपाठी

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के महामना मदन मोहन मालवीय पत्रकारिता संस्थान में 29 मार्च बुधवार को पुरातन छात्र समागम 2023 सुहानी यादें कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस अवसर पर अध्यक्षीय उद्बोधन में काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो.आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि पत्रकारिता ने हमें हर दृष्टि से प्रभावित किया है। आज पत्रकारिता का असर पहले से कई गुना ज्यादा है। हम एक छोटे कमरे में बैठ कर पूरे विश्व का केंद्र बन सकते हैं और उसके लिए हमे अपडेट रहना पड़ेगा तभी हम दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चल पाएंगे। उन्होंने कहा कि नई चीजों को सिलेबस में जोड़ना जरूरी है लेकिन इतिहास को भी जानना जरूरी है तभी जड़ से मजबूती मिलेगी। आज पत्रकारिता में उसका मूल्य ही सबसे बड़ा सवाल है। उन्होंने काशी के परिप्रेक्ष्य में कहा कि पत्रकारिता और राष्ट्रीयता को अलग करना असंभव है। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संस्थान के पूर्व छात्र व एक दैनिक अखबार के संपादक वीरेंद्र आर्य ने पत्रकारिता की दुनिया में आए नए छात्रों का स्वागत किया और कहा कि आज पत्रकारिता केवल सूचना मात्र का उपकरण नही है बल्कि हमारी जरूरतों को समाज के सामने प्रस्तुत करने का भी एक सशक्त माध्यम बन गया है। उन्होंने कहा कि केवल पाठ्यक्रम पढ़ के पत्रकारिता नही की जा सकती है जब तक हम उसके व्यवहारिक ज्ञान को नही समझेंगे।
इसी कड़ी में संस्थान के पुरातन छात्र, भाजपा प्रवक्ता और देवरिया विधानसभा के विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा कि मैं यहां एक विधायक या पार्टी के प्रवक्ता की तरह नहीं आया हूं बल्कि एक पुरातन छात्र की भूमिका में आया हूं। उन्होंने पत्रकारिता की दुनिया में अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि मैं बड़ा सौभाग्यशाली हूं की इस संस्थान का छात्र होने का मौका मिला और सबसे बड़ी बात ये है कि जिस संस्थान से मैं जुड़ा वो स्वतंत्रता के इतिहास से जुड़ा हुआ है। आज पत्रकारिता में हमारे सामने अनंत आकाश की संभावना है। एक समय ऐसा भी था जब एक कॉलम भी लिखना मुश्किल था लेकिन अब हमारे पास व्यापक आयाम और संसाधन है। उन्होंने अब्दुल कलाम की बात दोहराते हुए बोला कि सपने वो नही जो हम बंद आंखों से देखते हैं। सपनें वो है जो हम खुली आंखों से देखते हैं। हमें अपने सपनों को साकार करने के लिए हमेशा दृढसंकल्पित होना चाहिए। इस मौके पर संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो.ओम प्रकाश सिंह ने कहा कहा कि परीक्षा देना एक तकनीक है। अगर आप चाहेंगे तो पत्रकारिता का छात्र कभी बेरोजगार नहीं रहेगा अगर उसके पास कौशल है। आज सबसे खतरनाक सोशल मीडिया है। जो एक खतरनाक नशा है।
अतिथियों का स्वागत कार्यक्रम के निदेशक प्रो. अनुराग कुमार ने किया।
इस मौके पर दैनिक समाचार पत्र के महाप्रबंधक डॉ. अंकुर चढ्ढा विद्यापीठ की कुलानुशासक प्रो. अनीता सिंह डॉ. नलिनी श्याम कामिल डॉ. ए.के. लारी, डॉ. दयानंद डॉ. वशिष्ठ नारायण डॉ. संतोष कुमार मिश्रा डॉ. विनोद कुमार सिंह समेत सूरज चौबे देवेंद्र गिरी रजनी चौबे आयुषी तिवारी मिथिलेश अश्वनी प्रोनोतो जया सौम्या मंगलम चंदन वर्तिका समेत सभी नए- पुराने छात्र शामिल रहे। लगभग 200 पुरातन छात्र ऑनलाइन भी जुड़े रहे।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र के मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार डॉ दयानंद थे जबकि अध्यक्षता प्रो ओम प्रकाश सिंह ने की । इस सत्र में सभी पुराने छात्रों ने अपने अपने विचार साझा किए।
पुरातन छात्र समिति का गठन
पत्रकारिता संस्थान में पुरातन छात्र समागम की परंपरा को आगे भी संचालित करने के लिए एक समिति का गठन हुआ। सर्वसम्मति से समिति का अध्यक्ष डॉ. अंकुर चढ्ढा, उपाध्यक्ष डॉ. जिनेश कुमार और मोहम्मद जावेद, सचिव डॉ. रवींद्र पाठक, सहसचिव सरिता राव और अभिलेख प्रबंधक डॉ. अर्चना सिंह को चुना गया।
कार्यक्रम का संचालन नेहा कुमारी और मोहम्मद जावेद ने तथा धन्यवाद ज्ञापन कार्यक्रम के संयोजक डॉ. नागेंद्र कुमार सिंह ने किया।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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