
एटा,जवाहर लाल नेहरू महाविद्यालय, एटा की राष्ट्रीय सेवा योजना की तीनों इकाइयों का सात दिवसीय विशेष शिविर रोज एकेडमी स्कूल, आगरा रोड, एटा में चल रहा है। शिविर के तीसरे दिन आज दिनांक 22 मार्च 2023 को कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं वंदना के साथ हुई। राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने एन.एस.एस. की शपथ ली और एन.एस.एस. गीत प्रस्तुत किया। शिविर का आज का दिन उत्तर प्रदेश सरकार के महत्त्वाकांक्षी अभियान मिशन शक्ति की थीम पर केंद्रित रहा। वालेंटियर्स ने ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ पर एक जागरूकता रैली निकाली। शिविर में वालेंटियर्स ने ‘बेटी-बचाओ बेटी पढ़ाओ’ विषय पर एक नुक्कड़ नाटक का भी आयोजन किया। इसमें गायत्री, रिया माथुर, लोकेश सिंह, दीपा गुप्ता, मानसी और नेहा ने भाग लेकर अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियां दीं। इस नुक्कड़ नाटक के माध्यम से वॉलिंटियर्स ने आम जनता को यह संदेश दिया की यदि बेटियां नहीं पढ़ेंगी तो वे अज्ञान के अंधकार में डूबी रहेंगी। बालिकाओं के व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास के लिए उनका पढ़ना बहुत आवश्यक है। सभा में उपस्थित सभी लोगों ने इस नुक्कड़ नाटक की भूरि-भूरि प्रशंसा की। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित जवाहरलाल नेहरू महाविद्यालय, एटा की राजनीति शास्त्र विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ नीलम गुप्ता ने बताया कि प्रत्येक सभ्यता के निर्माण में महिलाओं की अहम भूमिका रही है किंतु वर्तमान समय में शिक्षा की कमी के कारण समाज में अभी भी महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं हैं। शिक्षित महिलाएं ही सशक्त और समुन्नत राष्ट्र का निर्माण कर सकती हैं। उन्होंने मनुस्मृति का उल्लेख करते हुए कहा कि जहाँ नारियों की पूजा होती है उनका सम्मान किया जाता है वहाँ देवता अर्थात् सुख-समृद्धि का वास होता है।
इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना की दूसरी इकाई की कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती जया गुप्ता ने कहा कि महिला सशक्तिकरण हमारी सोच पर निर्भर है। यदि हम उत्तम और रचनात्मक सोच रखेंगे तो स्वयं को सशक्त और समृद्ध बना सकेंगे। हमें सदैव सकारात्मक सोच रखनी चाहिए। हमें अपने चारों और न देखकर अपनी ही अच्छाइयों और बुराइयों पर विचार करना चाहिए और उनका परिमार्जन करते रहना चाहिए तभी हम अच्छे इंसान बन सकते हैं।
राष्ट्रीय सेवा योजना की प्रथम इकाई के कार्यक्रम अधिकारी श्री संजय यादव ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए महिलाओं का आर्थिक रूप से स्वावलंबी होना बहुत आवश्यक है । जब तक महिलाएं आर्थिक रूप से स्वावलंबी और स्वतंत्र नहीं होंगी तब तक वे किसी अन्य पर निर्भर रहेंगी और परनिर्भरता की अवस्था में उनका सशक्तिकरण संभव नहीं है। आज विश्व जल दिवस के संदर्भ में बोलते हुए श्री यादव ने कहा कि विश्व में होने वाले पानी के दुरुपयोग से चिंतित होने की आवश्यकता है। उन्होंने भारत में होने वाली पानी से जुड़ी समस्याओं की चर्चा करते हुए कहा कि पंजाब में भूजल का स्तर प्रतिवर्ष एक सेंटीमीटर की दर से घट रहा है इसका मुख्य कारण भूजल का अंधाधुंध दोहन है। पर्यावरण को बचाने के लिए इस पर तुरंत रोक लगाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना की तीसरी इकाई के कार्यक्रम अधिकारी डॉ रत्नेश कुमार मिश्र ने महिला सशक्तिकरण पर बोलते हुए विश्व में चल रहे नारीवादी आंदोलनों की चर्चा की। उन्होंने महिलाओं को भारत के प्राचीन गौरव ग्रंथों में वर्णित उत्तम नारियों के जीवन आदर्शों से प्रेरणा लेने की बात कही। आज के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जवाहरलाल नेहरू महाविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ पी.आर. मिश्र ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि महिला सशक्तिकरण आज की आवश्यकता है। सशक्तिकरण शिक्षा से जुड़ा प्रश्न है। शिक्षा में अध्ययन, लेखन और संभाषण तीनों सम्मिलित हैं। अध्ययन व्यक्ति में पूर्णता लाता है, लेखन से व्यक्ति में सटीकता आती है और संभाषण व्यक्ति को प्रत्येक परिस्थिति के लिए तैयार करता है। इसलिए हमें अपनी शिक्षा में अध्ययन, लेखन और संभाषण तीनों का ध्यान रखना चाहिए। यह चीजें व्यक्तित्व का विकास करती हैं। उन्होंने कहा कि आचरण और व्यक्तित्व परस्पर घनिष्ठ रूप से संबंधित हैं। हमारा आचरण हमारे व्यक्तित्व का निर्माण करता है। चरित्र हमारे जीवन के दैनिक कर्तव्यों के संपादन में अभिव्यक्त होता है। इसलिए हमें निरंतर आत्मालोचन करते रहना चाहिए कि हम जो कुछ कर रहे हैं उससे हमारा किस तरह का चरित्र निर्मित हो रहा है। उन्होंने सावधान किया कि लिबास को पर्सनालिटी का पर्याय न मान बैठें। लिबास सिर्फ ऊपरी चमक पैदा करता है चरित्र निर्माण के लिए हमें अंदर की चमक पैदा करने की आवश्यकता है और यह उचित शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने कहा कि हमें अपने युवाओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि यही राष्ट्र की रीढ़ हैं। प्रख्यात ग्रीक विचारक अरस्तु ने भी इस बात को कहा था कि हमें अपने युवाओं पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, उन्हें जितना संभव हो उतना अधिक अच्छा बनाने की आवश्यकता है। शिविर के दौरान स्वयंसेविकाओं ने मेंहदी प्रतियोगिता में बढ़चढ़ कर प्रतिभाग किया। शिविरार्थियों ने गीत एवं नाटक के माध्यम से अनेक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। स्वयंसेवकों में लोकेश सिंह, विशाल कुमार व अभिषेक तथा स्वयंसेविकाओं में रजनी, लक्ष्मी, श्वेता यादव, मुस्कान कुमारी, कशिश, पूजा, अनन्या, सौम्या, निधि सोलंकी, शिवानी, राधा, छवि, गीता, चंचल, कनक आदि की प्रस्तुतियां विशेष सराहनीय रहीं। आज के कार्यक्रम के संचालन की जिम्मेदारी प्रथम इकाई के स्वयंसेवक श्री सौरभ वर्मा, द्वितीय इकाई की स्वयंसेविका कु.सौम्या तथा तृतीय इकाई की स्वयंसेविका कु.पूजा ने संयुक्त रूप से बखूबी निभाई। इस अवसर पर महाविद्यालय के मुख्य अनुशासन अधिकारी डॉ. प्रवेश पांडेय, श्री विनोद आदि अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ.) भारत भूषण सिंह परिहार ने सभी स्वयंसेवकों व स्वयंसेविकाओं के उत्साहपूर्ण प्रतिभाग के लिए उनकी सराहना की तथा कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए कार्यक्रम अधिकारियों श्री संजय यादव, श्रीमती जया गुप्ता एवं डॉ. रत्नेश कुमार मिश्र को बधाईयां दीं।