बचना होगा एक और फ्लू से जो कोरोना जैसा हाल न कर दे

बचना होगा एक और फ्लू से जो कोरोना जैसा हाल न कर दे

कोरोना महामारी कमोबेश काबू में आ गई है, लेकिन दूसरी बीमारियों का आतंक पीछा नहीं छोड़ रहा है। भारत में हरियाणा और कर्नाटक में एच3एन2 इन्फ्लूएंजा अर्थात हांग कांग फ्लू के चलते शुक्रवार को पहली बार दो मौतें दर्ज की गईं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कर्नाटक के पीड़ित व्यक्ति को बुखार, गले में खराश और खांसी थी और उसमें इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी (आईएलआई) के लक्षण थे। कुल मिलाकर देखें, तो शुक्रवार तक देश में इस वायरस से पीड़ितों की संख्या करीब 3,000 तक पहुंच गई। इसमें कोई शक नहीं कि देश में फ्लू जैसे वायरस के बढ़ते मामले चिंता का सबब बनते जा रहे हैं। एच3एन2 एक गैर-मानव इन्फ्लूएंजा वायरस है, जो सामान्य रूप से सूअरों में पहले फैलता है और फिर मनुष्यों को संक्रमित करता है। अभी एच3एन2 से जुड़ी बीमारी की गंभीरता मौसमी फ्लू जैसी ही है। इसके लक्षणों में बुखार, श्वसन संबंधी समस्याएं जैसे खांसी, नाक बहना, शरीर में दर्द, मतली, उल्टी या दस्त सहित अन्य लक्षण शामिल हैं। केंद्र सरकार ने तमाम राज्य सरकारों को सतर्क कर दिया है। कुछ सरकारों ने लोगों को स्वयं अपना इलाज न करने की सलाह दी है।

इस बीमारी के लिए डॉक्टरों से सलाह जरूरी है, क्योंकि इसकी दवाइयां डॉक्टरों की अनुशंसा पर ही मिलती हैं। इस बीमारी से बचने के लिए भी बार-बार हाथ धोने की जरूरत पड़ती है। अगर यह बीमारी ज्यादा फैलेगी, तो कोरोना के समय जो सावधानियां बरती जा रही थीं, उनकी वापसी हो जाएगी। बिना हाथ धोए चेहरे, नाक या मुंह को छूने से बचना होगा। भीड़भाड़ वाली जगहों पर ज्यादा सावधान रहने की जरूरत पड़ेगी। बीमार लोगों के आसपास ज्यादा रहने से बचना होगा। कुल मिलाकर, फिर रोग प्रतिरोधक क्षमता की जरूरत बढ़ गई है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए जो भी उपाय संभव हैं, उनको करने में हर्ज नहीं है। कोरोना मामलों के बहुत घट जाने के बाद लोगों में सावधानी का स्तर भी घट गया है, जबकि फ्लू से सावधान रहना जरूरी है। विशेष रूप से जो लोग पहले से ही किसी बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें कुछ ज्यादा ही सतर्क रहना चाहिए। भारत में फ्लू टीकाकरण को भी बढ़ाना चाहिए। पहले के दौर में लोग खांसी-जुकाम को गंभीरता से नहीं लेते थे, लेकिन ये बीमारियों बार-बार इशारा कर रही हैं कि हमें अब स्वस्थ जीवन के लिए सर्दी-जुकाम से भी सावधान रहना होगा। मौसम भी बार-बार बदल रहा है, इसकी वजह से भी सतर्कता समय की मांग है।

कोरोना और लॉकडाउन को भुगत चुकी सरकार केवल सलाह ही दे सकती है, लेकिन अस्पतालों में बचाव व इलाज के इंतजाम पूरे रहने चाहिए। लोगों को निरोग रखना जरूरी है। यह आशंका पहले ही जताई गई थी कि समय-समय पर ऐसी संक्रामक बीमारियों का दौर आएगा। कुछ बीमारियां गंभीर होंगी, तो कुछ थोड़ा परेशान करके गुजर जाएंगी। यह नई बीमारी भी कुछ ही दिन की मेहमान है, लेकिन ध्यान रहे यह अंतिम मेहमान नहीं है। स्वास्थ्य व्यवस्था को चाकचौबंद रखना, अस्पतालों में दवाइयों की पूरी उपलब्धता सुनिश्चित करना, गरीबों के इलाज को सुगम बनाना, आयुष्मान जैसी कारगर योजनाओं को वस्तुत जमीन पर बेहतर ढंग से साकार करना बहुत जरूरी है। कुल निचोड़ यही है कि किसी भी बीमारी से भयभीत होने की जरूरत नहीं है, अपनी जीवन शैली और रहन-सहन को ऐसा बनाने की जरूरत है कि कोई बीमारी पास न फटकने पाए।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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