भारतीय मीडिया फाउंडेशन परिवार की ओर से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मातृशक्ति के पावन चरणों में कोटि कोटि प्रणाम एवं उन्हें बहुत-बहुत बधाई।*
*महिला सशक्तिकरण ही विकसित राष्ट्र का महत्वपूर्ण मार्ग।*

8 मार्च अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर भारतीय मीडिया फाउंडेशन की खास रिपोर्ट।
नई दिल्ली-
भारतीय मीडिया फाउंडेशन के संस्थापक एके बिंदुसार ने संगठन के सभी मीडिया अधिकारियों एवं पदाधिकारियों को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर मातृत्व शक्ति माताओं एवं बहनों को शुभकामनाएं दी हैं।
उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा आठ मार्च,1975 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से मनाई जाती हैं। फिर महिला सशक्तिकरण की पहल 1985 में महिला अंतरराष्ट्रीय सम्मलेन नैरोबी में की गई।
महिला सशक्तिकरण का राष्ट्रीय उद्देश्य महिलाओं की प्रगति और उनमें आत्मविश्वास का संचार करना हैं। महिला सशक्तिकरण देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। महिलाओं का सशक्तिकरण सबसे महत्वपूर्ण चीज है क्योंकि वे रचनाकार होती हैं। अगर आप महिला सशक्तिकरण के आयाम
आर्थिक सशक्तिकरण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का तात्पर्य उनकी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भरता एवं सशक्त क्षमता से है। …
सामाजिक सशक्तिकरण …
राजनीतिक सशक्तिकरण …
धार्मिक सशक्तिकरण के रूप में उन्हें सशक्त करें, उन्हें शक्तिशाली बनाएं, प्रोत्साहित करें, यह देश के लिए अच्छा है।
उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान लिंग के आधार पर भेदभाव पर रोक लगाता है और सरकार को उनके लिए विशेष उपाय करने का अधिकार देता है। भारत के संविधान के तहत महिलाओं के अधिकारों में मुख्य रूप से समानता, गरिमा और भेदभाव से मुक्ति शामिल है; इसके अतिरिक्त, भारत में महिलाओं के अधिकारों को नियंत्रित करने वाले विभिन्न क़ानून हैं।
भारत का संविधान सभी भारतीय महिलाओं को समानता (अनुच्छेद 14), राज्य द्वारा कोई भेदभाव नहीं (अनुच्छेद 15 (1), अवसर की समानता (अनुच्छेद 16), समान काम के लिए समान वेतन (अनुच्छेद 39 (डी) और अनुच्छेद की गारंटी देता है 42 ।
महिलाएं परिवार बनाती है, परिवार घर बनाता है, घर समाज बनाता है और समाज ही देश बनाता है। इसका सीधा सीधा अर्थ यही है की महिला का योगदान हर जगह है। महिला की क्षमता को नज़रअंदाज करके समाज की कल्पना करना व्यर्थ है। शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के बिना परिवार, समाज और देश का विकास नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जो नारी की स्थिति है वह पहले से भी कहीं बत्तर होती जा रही है जीवन से जुड़े सभी क्षेत्रों में नारी पर अत्याचार एवं शोषण किया जा रहा है अतः अब आवश्यकता इस बात की है हम स्वयं जागरूक हो एवं अपने प्रति हो रहे दिन प्रतिदिन बढते अत्याचारों का विरोध तो करें ही साथ में हर कदम पर सतर्क रहें।
उन्होंने कहा कि भारत में महिलाओं की स्थिति सदैव एक समान नही रही है। इसमें युगानुरूप परिवर्तन होते रहे हैं। उनकी स्थिति में वैदिक युग से लेकर आधुनिक काल तक अनेक उतार – चढ़ाव आते रहे हैं तथा उनके अधिकारों में तदनरूप बदलाव भी होते रहे हैं। वैदिक युग में स्त्रियों की स्थिति सुदृढ़ थी , परिवार तथा समाज में उन्हे सम्मान प्राप्त था परंतु आज हर कदम पर महिलाओं का शोषण हो रहा है इसके लिए श्री महिलाओं को एक झंडे के नीचे संगठित होना होगा।