
डकैत अधिकारियो का बोलबाला,साँचे का मुँह काला
मेडीकल कालेज प्रशाषन की बेहृआई
मीडिया के गैगवार का फायदा उठा रहे ये भृष्ट नौकरशाह।
एटा-चाटुकारिता इस हद तक पहुँच जायेगी।कभी कल्पना भी नही की थी।दूर जनपदों मे जन्मे ये अधिकारी लुटेरे बन जायेंगे कल्पना से परे था।ये अधिकारी भूले बैठे हैं कि हम अधिकारी है।अधिकारी बाद मे हो पहले परदेशी हो।और चापलूस समझ बैठे है।कि ये हमारे घनिष्ठ है। ये घनिष्ठ बाद मे है।पहले जिला तुम्हारा है।ये भ्रम (अधिकारी और घनिष्ठ)दौनों ने पाल लिया है। कभी एक प्रसारित धारावाहिक
“एक से बढकर एक” की तर्ज पर अधिकारी खरे उतरने मे लगे है।और मीडिया एक दूसरे को निम्न स्तर का बताने मे लगा है।इस वर्ष की कुछ घटनाओं पर विचार करो।कुछ मीडिया ने नुमाइश को सबसे फिसड्डी नुमाइश छापा।तो कुछ ने सर्वोत्तम छापा।किसी ने नुमाइश मे आये कलाकारों के कार्यक्रम को बेहद असफल तो किसी ने अति सफल।कुछ मीडियाजनों ने एक होटल की सीज कार्यवाही को उचित तो कुछ ने अनुचित बताया।मीडिया ने एक राशन निरीक्षक को भृष्ट करार दिया तो मीडिया ने ही राशन निरीक्षक से रंगदारी,चौथ बसूली करार दिया। वी मार्ट शो रूम के उदघाटन पर कुछ मीडिया ने बढचढ कर प्रसार करना उचित समझा तो कुछ ने अतिक्रमण आदि को अनुचित ठहरा दिया।अब कुछ मीडिया ने मेडिकल की एक सुई से एडस बाटनेखबर को महत्वपूर्ण खबर मानते हुए मेहनत की तो कुछ मीडिया ने अधिकारियों को खंन्डन की कार्यवाही मे पूरी अक्ल लगा दी और आनन फानन मे भृष्ट डकैत नौकरशाह ने मैडीकल कालेज के रजिस्टर को साक्षी मानकर साँची मीडिया को ही गलत ठहराने का भरसक कुप्रयाश किया।ये तो मैने कुछ नमूने ही पेश किये है।इस महागठजोड का ध्यान पहले भी मैं आकृषित करने का प्रयास कर चुका हूँ ।मगर अपने-अपने निजी स्वार्थ मे दौनों चूर है।प्रवुद्ध जन सब जानते हैं। आज आप जो कर रहे है।कल आपको उसी से गुजरना है। सीवर लाईन,विकाश विभाग,मैडीकल कालेज,जिला स्वास्थ्य विभाग,और भी कई विभाग है।जिनमे अधिकारी लूटपाट तो छोडो सीधी सीधी डकैती डाल रहे है। और इनके आका बडे डकैत को बचाकर ग्रामीण भाषा मे कचरिया चोर पर कार्यवाही कर जनता और जिले को मूर्ख बनाने का कुप्रयास कर रहे है।इन्हें इतना भी भान नहीं है।कि योगी सरकार इन बडे डकैतों की भी जाँच कराने पर बल दे रही है।यदि जाँच हुई तो… प्रवुद्ध वर्ग इनके कार्यों पर ठहाके लगा रहा है। कह रहा है कि भाई जिले मे डकैत अधिकारियो का बोलबाला है।साँचे का मुँह काला है। (पत्रकार जसवन्त सिंह यादव स्वतंत्र भारत )