लैंगिक असमानता व वर्ग-भेद को मिटा कर नई परिभाषा गढ़नी होगी: प्रोफेसर आनंद कुमार।

वाराणसी आज महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के समाजशास्त्र विभाग में संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया जिसमें अतिथियों का स्वागत विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रेखा ने किया एवं अपने वक्तव्य में कहा कि भारतीय समाज में व्याप्त रुणिवादी मानसिकता न सिर्फ कम पढ़े-लिखे बल्कि उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों मे व्याप्त है जिसे शोध के द्वारा बदलने की आवश्यकता है जिससे वर्तमान समाज स्वतंत्र निर्भीक और प्रजातान्त्रिक बन पाएगा। मुख्य अतिथि पूर्व अध्यक्ष, अखिल भारतीय समाजशास्त्रीय परिषद एवं विश्व विख्यात, समाजशास्त्रीय प्रोफेसर आनंद कुमार ने भारतीय समाज का समाजशास्त्रीय अध्ययन-दशा एवं दिशा पर अपने अमूल्य विचार व्यक्त किए। अपने व्याख्यान में विकास भूमंडलीकरण ,जेंडर स्टडी, भागीदारी और स्वतंत्रता पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हमें भारतीय सामाजिक संदर्भ में बाबा साहब डा भीम राव अंबेडकर एवं महात्मा गांधी के परिकल्पना के आधार पर स्त्री अस्मिता, सामाजिक न्याय, ग्रामीण नगरी समानता, वर्ग-भेद, जाति-भेद की नई परिभाषा गढ़नी होगी एवं अंतर विषयी शोध को बढ़ावा देना होगा तभी हम समाजशास्त्र विषय को नई दिशा दे पायेंगे। विशिष्ट अतिथि के तौर पर प्रोफेसर रवि प्रकाश पाण्डेय, पूर्व संकायाध्यक्ष छात्रकल्याण काशी विद्यापीठ ने कहा कि सामाजिक समस्यायों का अध्ययन हमें परिवर्तित संदर्भों को ध्यान में रखते हुए अन्य विषयों को भी शामिल किया जाना चाहिए। इस अवसर पर कुलानुशासक प्रोफ़ेसर अमिता सिंह, प्रोफेसर तेज बहादुर सिंह, प्रोफेसर भारती रस्तोगी, डॉक्टर जयप्रकाश यादव, डॉ सौम्या यादव डॉक्टर चन्द्रशेखर, डॉक्टर संजय सोनकर, सतीश गौतम, नंदलाल, रविदास, प्रमोद मौर्या एवं महाविद्यालयों के प्राध्यापकगण एवम् विभाग के शोध छात्र/छात्राएं उपस्थिति रहे संगोष्ठी का संचालन सुश्री सोभा प्रजापति ने किया कार्यक्रम के अंत में प्रोफेसर ब्रजेश कुमार सिंह संकायाध्यक्ष समाज विज्ञान संकाय के द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया।