
जिला कारागार में लग रही है बंदियों की पाठशाला
कासगंज, । निरक्षर व्यक्ति में ज्ञान संस्कार और लोकाचार का अभाव देखने को मिलता है। अशिक्षा के कारण उसमें आपराधिक मानसिकता का विकास आसानी से हो जाता है। यह माना जाता है कि साक्षरता आने से व्यक्ति के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन आता है और आसानी से वह आपराधिक क्षेत्र की ओर आकर्षित नहीं होता है। साक्षरता के इसी महत्त्व को देखते हुए कासगंज की जिला जेल में निरक्षर बंदियों को साक्षर करने की मुहिम चलाई जा रही है।
शिव नाडर फाउंडेशन नोएडा द्वारा आयोजित निरक्षर बंदियों को साक्षर करने के लिए कासगंज की जिला जेल में बंदियों को शिक्षित करने के लिए प्रतिदिन दो घंटे कक्षाएं लगाईं जा रहीं हैं। बंदियों को साक्षर करने के लिए जेल में चार महीने तक चले पहले बैच को पूर्ण कर लिया गया है। इसमें 35 बंदियों को अब तक साक्षर किया जा चुका है। वहीं अन्य 35 निरक्षर बंदियों को साक्षर करने के लिए दूसरे बैच भी आरम्भ हो चुका है। इन बंदियों को प्रोजेक्टर के माध्यम से बड़े ही मनोरंजक तरीके से अक्षर ज्ञान कराया जा रहा है। फाउंडेशन की ओर से इस पाठशाला में पढ़ाई के लिए आने वाले बंदियों को नई किरण के नाम से एक किताब के साथ कॉपी व पेन-पेंसिल का भी वितरण किया जा रहा है। जेल में साक्षरता का यह कार्यक्रम भविष्य में निरंतर चलता रहे। इसके लिए फाउंडेशन ने पांच बंदियों को भी शिक्षण कार्य के लिए प्रशिक्षित कर दिया है।
जेल केवल ईंट, पत्थर और सीमेंट का एक निर्जीव ढांचा भर नहीं है, वल्कि इसका समूचा अस्तित्व ही समाज से है। बंदियों को शिक्षित करने की यह मुहिम समाज सुधार की प्रक्रिया का हिस्सा है।
विजय विक्रम सिंह, जेल अधीक्षक, कासगंज
शिव नाडर फाउंडेशन द्वारा आईसीटी डिजिटल कंटेंट के माध्यम से निरक्षर बंदियों को साक्षर करने का काम किया जा रहा है। प्रदेश के नौ जिलों की जेलों में इस तरह का शिक्षा अभियान संचालित किया गया है। इनमें जिला कासगंज समेत गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, उन्नाव व प्रयागराज शामिल हैं। सोबरन सिंह, सीनियर रिसोर्स कॉर्डिनेटर शिव नाडर फाउंडेशन