
आशीष पटेल-संजय निषाद ने किया जातीय जनगणना का समर्थन
जातीय जनगणना पर दो मंत्रियों ने सपा को घेरा
चार बार सत्ता में रहने वाली सपा ने क्यों नहीं जातिगत जनगणना कराई
लखनऊ, विशेष संवाददाता। उत्तर प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को बसपा, सुभासपा के साथ-साथ दो मंत्रियों ने भी जातिगत जनगणना का समर्थन किया। ज्यादातर दलों के नेताओं ने सपा की मंशा पर सवाल उठाते हुए उस पर तीखा हमला भी बोला।
राज्यपाल के अभिभाषण पर चल रही चर्चा में भाग लेते हुए अपना दल सोनेलाल के नेता व प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि उनकी पार्टी जातिगत जनगणना का मुद्दा पिछले बीस साल से उठा रही है, लेकिन चार बार सत्ता में रहने वाली सपा ने क्यों नहीं जातिगत जनगणना कराई।
प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि सपा के लिए यह मुद्दा चुनावी फार्मूला है, लेकिन हम लोगों के लिए भावात्मक मुद्दा है। सपा को यह मुद्दा विपक्ष में रहने पर ही याद आता है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विश्वसनीयता का सवाल उठाने वाले नेता प्रतिपक्ष की पार्टी को जनता ने नकार दिया। जब वह जापान गए तो जापानी निवेशकों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत में अब उन्हें ज्यादा भरोसा है। यह होती है राजनीतिक विश्वसनीयता।
मैन्यूअल आधारित हो जातीय जनगणना निषाद
प्रदेश सरकार में मत्स्य मंत्री व निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने कहा कि विसंगति खत्म कर जातिगत जनगणना होनी चाहिए। वर्ष 1961 के सेंसस मैन्यूअल के आधार पर यह गणना उचित होगी। उन्होंने कहा कि सपा को हराने में उनकी पार्टी की भी भूमिका रही है। स्वामी प्रसाद मौर्य का नाम लिए बिना कहा कि कुछ लोग चौपाइयों के नाम पर प्रदेश देश को बांटने में लगे हैं। हम लोग निषादराज के वंशज हैं, जिन्हें श्रीराम ने गले लगाया था। उन्होंने कहा मझवार केवल जाति नहीं बल्कि जाति समूह है। इसे अनुसूचित जाति की श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए। सपा पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि इन लोगों ने मत्स्य विभाग में उर्दू अनुवादक रखवाए। क्या मछली उर्दू पढ़ती हैं।