भारतीय संस्कृत की झांकी है माटी की खुशबू – डॉ.रघुनंदन
कविता संग्रह के कवर पेज का हुआ विमोचन
शहरी कार्य मंत्री के आवास पर कार्यक्रम
एडिशनल एस.पी. कासगंज हैं रचनाकार

कासगंज 8 फरवरी। जनपद कासगंज के एडिशनल एस.पी.जितेंद्र दुबे के द्वारा रचित एवं सामाजिक कार्यकर्ता, जेल सुधारक डॉ. प्रदीप रघुनंदन के द्वारा संपादित काव्य संग्रह माटी की खुशबू के कवर पेज का विमोचन दिल्ली में शहरी विकास मंत्री कौशल किशोर जी के आवास पर संपन्न हुआ। काव्य संग्रह माटी की खुशबू में भारतीय संस्कृति एवं सामाजिकता को परिभाषित करती हुई 100 रचनाएं हैं। काव्य संग्रह का प्रकाशन रवीना प्रकाशन दिल्ली के द्वारा किया गया है।
आज दिल्ली में शहरी विकास मंत्री कौशल किशोर जी ने काव्य संग्रह माटी की खुशबू के कवर पेज का विमोचन करते हुए कहा कि यह रचनाएं भारतीय संस्कृत और सामाजिकता की प्रथम झांकी है। जहां एक तरफ मा का प्यार है वहीं दूसरी ओर भाई का सहयोग है। सामाजिक जीवन के कई मार्मिक एवं भावनात्मक चित्र का बहुत ही खूबसूरत वर्णन जितेंद्र दुबे ने अपने काव्य में किया है। शहरी विकास मंत्री ने कहा कि कविताएं जीवन में ऊर्जा का प्रवाह करती हैंl भाषा और शिल्प की दृष्टि से काव्यसंग्रह माटी की खुशबू अपने आप में सर्वोत्तम है।
काव्य संग्रह माटी की खुशबू का संपादन करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता, जेल सुधारक डॉ प्रदीप रघुनंदन ने कहा कि कभी जितेंद्र दुबे ने अपने काव्य संग्रह में मानवीय भावनाओं को संप्रेषित करने का काम किया है। काव्य संग्रह माटी की खुशबू में जहां मां का प्यार है वही पिता की सीख भी है। कहीं जीवन की आपा धापी और संघर्ष के रंग हैं तो कहीं राष्ट्र प्रेम और सामाजिक चेतना का भाव भी है। डॉ रघुनंदन ने कहा कि अपर पुलिस अधीक्षक श्री जितेंद्र दुबे ने कवि के रूप में काव्य संग्रह माटी की खुशबू को सामाजिक सरोकारों से जोडते हुए मानवीय चेतना प्रभावित करने का।करने का काम किया है।
काव्य संग्रह माटी की खुशबू के विमोचन के अवसर पर विधायक राजेंद्र सिंह पटेल, मंत्री के एडिशनल प्राइवेट सेक्रेट्री आदित्य शुक्ला, ज्ञान कौशल मनीष कुमार, आनंद मिश्रा राघवेंद्र शर्मा पत्रकार सहित दर्जनभर लोग उपस्थित थे।