क्षमता से ज्यादा बन गए राशन कार्ड

सरकार ने वर्ष 2011 की जनगणना के हिसाब से तय कर दिए मानक, अब एक की भी गुंजाइश नहीं
क्षमता से ज्यादा बन गए राशन कार्ड

एटा, । नए राशन कार्ड को लेकर हाउस फुल हो गया। अब हालात यह है कि एक भी नए राशन कार्ड बनने की गुंजाइश नहीं है। कार्ड के लिए हर दिन प्रार्थना पत्र आ रहे हैं। हर आवेदन जांच में उलझा हुआ है। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक जो मानक हैं उससे भी अधिक राशन कार्ड बन गए हैं। इस समय जिले में 13 लाख 42 हजार यूनिट से राशन कार्ड धारक हैं। सरकार ने राशन कार्ड बनने वाली साइड भी बंद कर दी है।

कोरोना काल के समय से राशन कार्ड की डिमांड बढ़ गई, जो राशन कार्ड नहीं लेता था उसने भी राशन कार्ड को लगे हाथों बनवा लिया। सरकार की ओर से जारी निर्देश में बताया गया है कि ग्रामीण क्षेत्र में 79.53 फीसदी तथा शहरी क्षेत्र में 64. 43 फीसदी से अधिक राशन कार्ड नहीं बन सकते हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के हिसाब से जिले की जनसंख्या करीब 18 लाख हैं। इसके लिए हिसाब से राशन कार्डों की संख्या 13 लाख के आसपास होनी चाहिए। इस आंकड़े के हिसाब से भी कार्ड की संख्या अधिक निकल गई। जिला पूर्ति विभाग के आंकड़ों को देखे तो ग्रामीण क्षेत्र में दो लाख 78 हजार 696 राशन कार्ड है। इसके बदले 11 लाख 79 हजार 695 यूनिट राशन कार्ड पर है। ऐसे ही शहरी क्षेत्र में 62 हजार 270 राशन कार्ड है। इनकी यूनिटों की संख्या एक लाख 62 हजार 270 है। जो मानक क्षमता से काफी अधिक है।
शासन के निर्देश है कि वर्ष 2011 की जनगणना के हिसाब से राशन कार्ड होने चाहिए। इस समय जो राशन कार्ड वह क्षमता से अधिक हो गए है। ऐसे में नए राशन नहीं बन पा रहे है। वेब साइड भी इस समय बंद चल रही है। सत्यापन रिपोर्ट आने पर जो कार्ड गलत मिलते है उन्हें डिलीट कर दिया जाता है। उनका स्थान खाली होने पर नए पात्रों को राशन कार्ड दिए जाएंगें।

कमलेश गुप्ता, जिलापूर्ति अधिकारी एटा

पूर्ति विभाग करा रहा सत्यापन
विभाग जिले भर में राशन कार्डों की सत्यापन करा रहा है। कितने लोग अपात्र है। किसी की मृत्यु तो नहीं हो गई। इन सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है। राशन कार्ड अपात्र मिले तो उन्हें निरस्त किया जाएगा।

राशन कार्ड बनने वाली साइड चल रही बंद

नए राशन कार्ड बनाने के लिए ऑन लाइन आवेदन किए जाते थे। इस पर स्वयं आवेदन कर सकते थे। काफी दिनों से यह वेबसाइड खुल ही नहीं रही। ऐसे में लोग अब नए राशन कार्ड बनवाने के लिए ऑफ लाइन आवेदन दे रहे है। ऑफ लाइन आवेदन देने के बाद भी एक भी राशन कार्ड नहीं बन पा रहा है। जनपद में करीब एक हजार राशन कार्ड बनने के आवेदन जांच में चल रहे है। जब तक जांच नहीं होगी तब तक यह नहीं बन सकते है। शहरी क्षेत्र के आवेदनों को जांच के लिए नगर पालिका में भेजा है। जबकि ग्रामीण क्षेत्र के आवेदनों को तहसील में भेजा जाता है। वहां से जांच रिपोर्ट लगने के बाद यह राशन कार्ड बना पाते है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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