क्यों कुछ लोग दूसरों को ही दोष देते हैं ?, रिपोर्ट योगेश मुदगल

गलती को पहली बार में ही मान लेने वाले कम होते हैं। अकसर ठीकरा दूसरों पर फोड़ने की कोशिश की जाती है। पर, अपनी कमियों, के लिए दूसरों को दोष देने का यह स्वभाव कुछ लोगों में बहुत अधिक देखने को मिलता है।
दूसरों पर दोष डालना एक तरह का खुद को सुरक्षित करने का तरीका है। कुछ लोग स्वयं में कुछ कमियों, बेचैनियों का होना स्वीकार नहीं कर पाते। ऐसे में वे उन्हें दूसरों में देखने लगते हैं। यही वजह है कि दूसरों को दोष देने पर वे हल्का महसूस करते हैं। ऐसे में यह अहं को संतुष्ट करने, खुद को सुरक्षित महसूस कराने और भावनात्मक उथल-पुथल, संकोच और शर्मिंदगी से बचने का तरीका बन जाता है।
साइकोलॉजी टुडे में छपे एक लेख के अनुसार, दूसरों को दोष देने की प्रवृत्ति उनमें अधिक देखने को मिलती है, जिन्हें अपनी भावनाओं को काबू करने में दिक्कत होती है, ऐसे लोग भावनाओं को मैनेज नहीं कर पाते। यह अध्ययन पर्सनैलिटी एंड इंडिविजुअल डिफरेंसेस में छपा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे लोग जिन्हें नेगेटिव इमोशंस संभालना नहीं आता, वे अकसर अपने गलत चुनाव के लिए दूसरों को दोष देते हैं। वहीं भावनात्मक संतुलन वाले लोग नेगेटिव बात से उतनी बुरी तरह प्रभावित नहीं होते। टीम के अनुसार, इस आदत को छोड़ने की कोशिश की जा सकती है। इसके लिए पहला कदम है खुद को खुद भावनात्मक स्तर पर मजबूत बनाना। जरूरत हो तो इस बात के लिए अपने किसी प्रिय या पेशेवर की मदद भी ली जा सकती है।