
“राजकीय आयुर्वेदिक कालेज”की “अव्यवस्थाओं” को लेकर “पीड़ित” छात्र छात्राओं ने छेड़ा “आन्दोलन” मांगे पूरी होने तक बैठे धरने पर–
लखनऊ आपको बतादें की “आयुर्वेद” ही कई बीमारियों को जड़ से खत्म करने का एक “अचूक साधन” है जिसका प्रयोग सदियों से हमारे “रिषि मुनियों” द्वारा किया जाता रहा तथा आज भी इसके जानकर चिकित्सक इसके प्रयोग को ही प्राथमिकता देते हैं ताकि भले ही देर से ही सही लेकिन “बीमारी” को जड़ से खत्म किया जा सके बस इसी विश्वास को लेकर आज भी हमारे संत महात्मा “ग्रन्थों” में मिलने वाले आयुर्वेदिक “जड़ी बूटियों” के प्रयोगों को ज्यादातर अपनाते भी है तथाआने वाले भविष्य में इसकी जरूरत को लेकर सैकड़ों नौजवान छात्र छात्राओं ने अपनी सोच के अनुसार आयुर्वेदिक दवाओं के शोध एवं आयुर्वेदिक दवाओं के प्रति सच्चा एवंअच्छा ज्ञान प्राप्त करने तथा अपना “भविष्य संवारने” को लेकर शासन द्वारा वर्षों से संचालित राजकीय आयुर्वेदिक कालेज अतर्रा में प्रवेश लिया किन्तु कालेज में फैली अव्यवस्थाओं का दंश झेल रहे छात्र छात्राओं ने कालेज प्रशासन की “लापरवाही” को उजागर ना करते हुये सबकुछ सहते रहे किन्तु हद तो तब हो गयी जब छात्रों के रहने की व्यवस्था की कमी के चलते उन्हें “किराये के मकानों” का सहारा लेना पड़ा जहाँ पर तरह तरह की यातनाएँ सहने के बाद भी “अपने भविष्य” को लेकर सब कुछ दरकिनार करते रहे किन्तु जब एक किराये की बिल्डिंग की तीसरी मंजिल में रह रहे 4 छात्र जिसके प्रथम तल में “इलेक्ट्रॉनिक स्कूटी” का शोरूम एवं उसी से आने जाने का मुख्य रास्ता भी जहाँअज्ञात कारणों से “आग लगने” से वहां पर आग के तांडव से निकलने वाली आग एवं धुयेंमें फंसे छात्रों के