लोधी समाज की जमीन पर कब्ज़ा कर रहे दबंग, विधायक से लगाई गुहार तब भी थम नहीं रही जंग

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लोधी समाज की जमीन पर कब्ज़ा कर रहे दबंग, विधायक से लगाई गुहार तब भी थम नहीं रही जंग

एटा।जलेसर- कोतवाली क्षेत्र जलेसर के महानमई में लोधी समाज के किसानों की निजी जमीन पर जनप्रतिनिधियों के एजेंट, भाई बिरादरी अवैध कब्जा कर ले रहे हैं मीडिया वाले शासन प्रशासन के पदाधिकारियों को खरी खोटी सुना रहे हैं दबंगों पर कार्यवाही की मांग उठा रहे है।

महानमई गाँव की जनता सरकार के पदाधिकारियों को पक्ष पाती बता रही है भेदभाव से भरी अमानवीय बतारही है कानून मंत्री के संसदीय क्षेत्र की जनता देख रही है इन सबकी करतूत मिल मिला कर इन सबको फेल बता रही है दलाल बता रही है।

सपना दिखाया था उत्तर प्रदेश को गड्ढा मुक्त, गुंडा मुक्त, हत्या मुक्त, माफिया मुक्त बनाने का परन्तु माफियाओं के सामने फजीहत हो जा रही है।

जर्जर हो रहे हैं हमारे लोकतंत्र के चारों स्तम्भ जिन्हें खम्भे कहें या पोल मानो इस बात की जलेसर सहित सारे जनपद एटा में पोल खुल जा रही है।

इस देश में मानवाधिकार की क्या दशा है इस पर एक रिपोर्ट आई है मगर हम पहले इसपर चर्चा नहीं कर रहे हैं।
दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के चारों स्तम्भ अंदर से कैसे खोखले होगये हैं इसकी एक झलक देख रहे हैं।।
भलेही सिस्टम में हैं ये मौसेरे भाई मगर एक दूसरे को चोर बता रहे हैं।

खुद क्या कर रहे हैं नहीं बता रहे हैं अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं। भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों की भ्रष्ट नीति के कारण किसानों की निजी जमीनों को अवैध तरीका से हथियाये जा रहे हैं मगर पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी हुई है कोई एक्शन नहीं ले रही है ऐसा महानमई के किसान बता रहे हैं यानी मीडिया के लोग दलाल नेताओं पर चिंता जता रहे हैं।

टीवी चैनलों के एंकर दिनों रात भड़काऊ बहस कर रहे हैं फिर भी उत्तर प्रदेश में भूमाफिया सक्रिय हैं मगर पुलिस उन पर एक्शन नहीं ले रही है ऐसा विपक्ष के नेता कह रहे हैं बढ़ती हुई नफरत पर चिंता जता रहे हैं।

जलेसर क्षेत्र में नई व्यवस्था लागू नहीं होने दे रहे हैं, यहाँ के जनप्रतिनिधि अपने ही रिश्तेदारों को अवैध कब्जा दिला रहे हैं ऐसा महानमई के पीड़ित किसान कह रहे हैं।

कुल एजीएम सिस्टम पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं, शासन प्रशासन की सह पर अल्पसंख्यकों, पिछड़ों पर अत्याचार हो रहे हैं, सत्ता में बैठे लोग भेद भाव कर रहे हैं ऐसा महानमई के पीड़ित किसान प्रेमपाल कह रहे हैं।

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के चारों खम्भे ध्वस्त हो रहे हैं अगर ये कुर्सी है तो चारों पायों में दीमक लग चुके हैं, ऐसा इंटरनेशनल एनजीओ कहरही है चारों स्तंभों की दशा देख कर कहरही है।

प्रशासन के अधिकारी शासन की कमियों को देख ले रहे हैं मगर खुद दिन रात वही काम कर रहे हैं जो स्थानीय नेता चाह रहे हैं।

आमजनता के लोग नेताओं अधिकारियों की हरकत देख रहे हैं।

सूबे के मुखिया सख्त निर्देश दे रहे हैं मगर स्थानीय नेता अवैध कब्जा करा रहे हैं हत्यारों को छुड़वा दे रहे हैं वेहद बुरा सन्देश दे रहे हैं।

सरकार के लोग न्यायपालिका में सुधार की तो सकारात्मक बात कर रहे हैं मगर खुद अमानवीय हरकत कर रहे हैं भेदभाव कर रहे हैं पक्षपात कर रहे हैं।

इस लिए सरकार के विपक्ष में बैठे नेता सरकार के लोगों की चौतरफ़ा की मूर्खता का आंकलन कर रहे हैं शर्मनाक हरकतों का गुणगान कर रहे हैं।

मानवीय मूल्यों पर खुदको सबसे वेहतरीन बताने वाले विधायक जातिवाद की सारी परतें उधेड़ दे रहे हैं वैसे तो कितनी अच्छी बात है कि जिम्मेदार लोग जनता दरबार लगाकर प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारियों की जवाबदेही तय कर रहे हैं भड़काऊ भाषण देने वालों की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई सोशलमीडिया पर सवाल खड़े कर रहे हैं हालाँकि ये वही लोग हैं जो अपने चहेतों जाति बिरादरी पर शासन प्रशासन से कोई सवाल नहीं कर रहे हैं।

न्याय के नाम पर आपस में लड़ते झगड़ते हैं फिरभी आपस में बाँटने का काम कर रहे हैं।

अवैध कब्ज़ों पर चिंता जता रहे हैं अच्छी बात है मगर इतना नहीं तय कर पा रहे हैं कि ये अवैध कब्जा खुद के रिश्तेदार क्यों कर रहे हैं।

जनपद के कुछ माफिया नफ़रत फैलाते हैं जिलाधिकारी कार्यवाही का निर्देश दे रहे हैं। वैसे तो एसडीएम जलेसर बेहतरीन काम कर रहे हैं मगर खुद माननीय न्यायालय के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं, ऐसा क्यों कर रहे हैं इसका जवाब नहीं दे रहे हैं।

हालाँकि केंद्र सरकार में मंत्री हैं किरन रिजिजू वो सड़ियल ज्यूडिशियल सिस्टम के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं कुलएजीएम सिस्टम को बदलने की बात कर रहे हैं। दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों के भागेदारी न्यायपालिका में कम है इसे बदलकर सबको उनका हिस्सा देने की बात कर रहे हैं अच्छा है कि सरकार के लोग चिंतित हैं सामाजिक न्याय के लिए मगर खुद कैसे पीड़ितों के संग अन्याय कर रहे हैं जलेसर क्षेत्र में पिछड़ों की जमीनों पर अवैध कब्जा हो रहे हैं हत्यारों को छोड़ दे रहे हैं पिछडों पर हो रहे अत्याचार पर चुप्पी साध ले रहे हैं और लोधियों पर इनके लोग ही अत्याचार कर रहे हैं और पिछड़ों को उनका हक अधिकार नहीं दे रहे हैं।

पिछड़ों को पिछड़ों से लड़ाया जाता है आपस में बांटा जाता है भड़काया जाता है और सत्ता मिलते ही उनका हक अधिकार नहीं दिया जाता है कहीं उनके हिस्से का आरक्षण लागू नहीं किया जाता है तो कहीं मिलरहे आरक्षण को खत्म कर दिया जाता है।

बिलकिस बानो के बलात्कारियों की रिहाई का भी जिक्र ह्यूमन राइट्स वाच की रिपोर्ट में है और बुल्डोजर की दमनकारी राजनीति का भी ज़िक्र है सामाजिक न्याय करने में सरकार की विफलता का भी जिक्र है और सिस्टम के गलत इस्तेमाल का जिक्र, हालाँकि ह्यूमन राइट्स वाच वाले चाहे जिसका जिक्र करलें सरकार को इसकी कोई फिक्र नहीं है उसे भरोसा है अपनी ही तरह पक्षपाती न्यायपालिका और कार्यपालिका पर मीडिया तो मानो टुकड़ों पर पल रही है थोड़े बहुत सवाल कर लिए जाते हैं लोगों को संतुष्ट करने के लिए वाकी तो सबकी मिलीभगत चल रही है।

चारों खम्भे यानी चारों पाये टूट कर इस तरह बिखर रहे हैं मानो कुर्सी फैल कर अर्थी बन रही है जैसे लोकतंत्र की अर्थी निकल रही है सबसे बड़े लोकतंत्र की ये दशा आप सबको दिख रही है।

संवाददाता-तुर्रम सिंह राजपूत✍️
आज समाचार/शान समाचार/स्वराज सवेरा जलेसर

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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