
@,एटा का जख्मी चेहरा—
एटा कार्य प्रणाली की सर्मनाक व्यवस्थाएं आज अंधी आंखों से भी देखी जा सकती है तीन साल से चल रही सीवर की खुदाई आजतक पूरी नहीं हो पा रही है और भी सर्मनाक किसी भी मनोरंजन से परे जिला,में दो साल के बाद रंग महोत्सव प्रदर्शनी का आयोजन चल रहा है तब मैन रोड हो या आउट सीवर का कार्य खुदाई चल रहा है जबकि प्रदर्शनी में बाहर से जानी मानी हस्तियां बड़ी कीमत अदा करने पर आ रही तब शहर खुदा हुआ पड़ा है आम पब्लिक को वहां तक पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है आए दिन एक्सीडेंट हो रहे हैं पर व्यवस्थाओं में कार्य को लेकर कोई तेजी दिखाई नहीं दे रही है,
सत्ताओं के मुखौटों पर उड़ती धूल कई प्रश्न छोड़ रही कि एक छोटा सा जिला अपने अधिकारों को लेकर मुद्दतों से ठगा जा रहा है और सत्ताधारियों पर कोई असर नहीं जब किसी बड़े नेता का आगमन होता है तो रातों रात शहर के जख्मों पर पोलिश पोत दी जाती या फिर शहर से बाहर ही उसकी व्यवस्था कर दी जाती है और जिम्मेदार मेहमान नवाजी करके चले भी जाते हैं पब्लिक राहों पर इंतजार बिछाए बैठी रहती है मजाल क्या है सुरक्षा घेरे से परिंदा भी नेताजी तक पहुंच सके शहर या आप बीती बताने के लिए और हर बार अधिकारों की उड़ती धूल खामोश होती रहती है जैसे कि नेता लोग इस अनदेखी पर बारिशों का मौसम भी संग लेकर आए हो।
दीप्ति।✍️