हाईकोर्ट के निर्णय के बाद नए दावेदारों की बढ़ गई संख्या, दिनभर रहीआदेश पर चर्चा
.तो पांच निकायों के पद हो जाएंगे अनारक्षित, रिपोर्ट योगेश मुदगल

एटा, कार्यालय संवाददाता। नगर निकाय को लेकर हाईकोर्ट के निर्णय के बाद फिर से चुनावी सरगर्मियों का माहौल बदल सा गया। अगर सही आदेश पर चुनाव हुआ तो जनपद की पांच निकायों का आरक्षण बदलकर अनारक्षित हो जाएगा। जिले में दस निकायों में आठ निकायो के अध्यक्ष पद आरक्षित थे।
मंगलवार की सुबह से ही लोगों की निगाहें हाईकोर्ट के निर्णय पर टिकी हुई थी। दोपहर में जैसे ही आरक्षण का निर्णय आया तो निकाय चुनाव की तैयारियों में जुटे लोगों के रुख बदल गए। दावेदार अपने-अपने समीक्षकों के यहां पर बैठकर इस निर्णय पर चर्चा करने लगे। जनपद की निकायों के आरक्षण की स्थिति क्या होगी। अभी तक एटा में पांच निकायों के अध्यक्ष पद अन्य पिछडा वर्ग और अन्य पिछडा वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित है। हाईकोर्ट के निर्णय के बाद यह सभी सीटें अनारक्षित मानी जाएगी। सरकार की ओर से आरक्षण की घोषणा के बाद वह भी लोग चुनाव मैदान से हट गए थे जो आरक्षण की जद में नहीं आ रहे थे। एटा नगर पालिका से सामान्य वर्ग के सभी लोगों ने अपनी दावेदारी हटा ली थी। वहीं लोग चुनाव की तैयारी कर रहे थे तो जो पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक रखते है।
सोशल मीडिया पर चल रही बहस
एटा। हाईकोर्ट का निर्णय आने के बाद सोशल मीडिया पर नई तरीके ही बहस शुरू हो गई है। कोई निर्णय को सही बता रहा है तो कोई इस निर्णय को गलत बता रहा है। सभी लोग अपने-अपने हिसाब से हाईकोर्ट के निर्णय पर टिप्पणी कर रहे है।
अब तक आरक्षण के हिसाब से यह था निकायों का आरक्षण
नगर निकाय का नाम आरक्षण
मारहरा एससी महिला
जलेसर पिछड़ा वर्ग महिला
एटा अन्य पिछड़ा वर्ग
अलीगंज अन्य पिछड़ा वर्ग
राजा का रामपुर अनुसूचित जाति
सकीट अन्य पिछड़ा वर्ग
मिरहची अन्य पिछड़ा वर्ग
जैथरा महिला
अवागढ़ अनारक्षित
निधौली कलां अनारक्षित
हाईकोर्ट का जो निर्णय है वह हम सभी को मान्य है। अभी पार्टी की ओर से कोई आदेश नहीं मिला है। जो भी हाईकमान का आदेश होगा वह मान्य होगा। वैसे हम चुनाव के लिए पूरी तहर से तैयार है।
संदीप जैन, जिलाध्यक्ष भाजपा
प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट में सभी तरीके से पैरवी नहीं की। अगर सही तरीके से पैरवी होती तो हो सकता है यह निर्णय ना आता।
परवेज जुबैरी, निवर्तमान जिलाध्यक्ष सपा
सरकार को हाईकोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखना चाहिए था। बिना ओबीसी आरक्षण के चुनाव हो पाना संभव नहीं है।
बलवीर भाष्कर, पूर्व जिलाध्यक्ष बसपा