डेंगू के बाद पोषक तत्वों का रखें ध्यान, रिपोर्ट योगेश मुदगल

सवाल मेरी उम्र 37 वर्ष है। अभी एक महीने पहले मुझे डेंगू हो गया था। तब पीरियड्स जल्दी हुए और रक्तस्राव भी ज्यादा होने लगा। पर अब काफी समय होने के बाद भी कमजोरी रहती है। कमर से लेकर पैरों में नीचे तक तेज दर्द रहता है। क्या अब यह दर्द और पीरियड्स की समस्या हमेशा रहेगी?
जवाब डेंगू ठीक होने के बाद लंबे समय तक मरीजों में जोड़ व मांसपेशियों में दर्द रहता है। इसलिए इसे वीक बोन फीवर कहा जाता है। कई बार यह दर्द, डेंगू होने के कई महीने बाद तक सामने आता है। इसके अलावा डेंगू में प्लेटलेट्स कम होने के बाद कुछ समय पीरियड्स में भी दिक्कत हो सकती है। जिन लोगों में विटामिन-डी की कमी होती है, उन्हें ऐसी समस्याएं अधिक होती हैं। इसलिए डेंगू से ठीक होने के बाद भी खाने-पीने पर ध्यान दें। विटामिन-डी और विटामिन-बी 12 जैसे पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए डॉक्टर से परामर्श करें। फिजियोथेरेपी और नियमित व्यायाम से भी दर्द को कम करने में मदद मिलेगी।
सवाल मेरी उम्र 71 वर्ष है। मुझे सर्दी में भी रात को बहुत पसीना आता है। इसका क्या कारण है? इस वजह से नींद भी खराब होती है। मुझे क्या करना चाहिए?
जवाब सर्दियों में सोते हुए पसीना आने की समस्या बेहद आम है और यह कई कारणों से हो सकता है। शरीर में पसीना हमारे तापमान को नियंत्रित करता है। सोते हुए अगर हमारे कपड़े या फिर बिस्तर से शरीर का तापमान बढ़ जाता है तो पसीने के जरिये शरीर, अपने तापमान को दोबारा नियंत्रित करता है। मसलन, फोम के मैट्रेस अकसर गर्मी रेडिएट करते हैं और तापमान को बढ़ा देते हैं। दूसरा, महिलाओं में मेनोपॉज के समय होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण भी यह समस्या सामने आती है। कुछ दवाएं जो आप नियमित लेते हैं, उसके कारण भी ऐसा हो सकता है। इस बारे में अपने डॉक्टर से पूछें। इसके अलावा थायरॉइड, एंग्जायटी, न्यूरोलॉजिकल समस्याएं या फिर ऑटो इम्यून बीमारियों के चलते भी सोते हुए पसीना आ सकता है। नशीली दवाएं व शराब अधिक पीना, अधिक तेल-मसाले और फैट वाला खाना खाना भी शरीर में गर्मी को बढ़ाता है। ऐसे लोग जो लंबे समय से तनाव में रह रहे हैं, जिन्हें बहुत स्ट्रेस रहता है, उन्हें भी ऐसी दिक्कत हो सकती है।
समस्या के समाधान के तौर पर सबसे पहले आप यह देखें कि यह आपके मैट्रेस और कंबल के कारण तो नहीं हो रहा है। इसके अलावा सोने से पहले कमरे का तापमान हल्का कम रखें, जिससे सोते हुए शरीर ठंडा हो सके। सोने से पहले भारी खाने या शराब के बहुत अधिक सेवन से बचें। चिंता कम करें। इन सब उपायों के बावजूद अगर समस्या बनी रहती है तो आप डॉक्टर से मिलें।
सवाल मेरी उम्र 44 साल है। मुझे थायरॉइड है और मैं 150 एमजी की टैबलेट लेती हूं। मेरा वजन अधिक है। क्या अब थायरॉइड हमेशा रहेगा और मुझे इतनी ही खुराक खानी होगी। मेरे पैरों और कमर में भी तेज दर्द होता है।
जवाब थायरॉइड दो तरह की होती है। आपको हाइपोथायरॉइड है यानी शरीर में थायरॉइड की मात्रा कम है। यह हार्मोन हमारे हमारे दिमाग, पेट और मांसपेशियों समेत कई महत्वपूर्ण अंगों के लिए जरूरी है। इसलिए जब यह ग्रंथि ढंग से सक्रिय नहीं होती तो दवा से इसका स्तर सामान्य रखते हैं। दवाई की खुराक के लिए जरूरी है कि हर 6-8 सप्ताह में आप थायरॉइड की जांच कराएं, उसी आधार पर डॉक्टर आपको सही खुराक दे सकेंगे। अगर थायरॉइड नियंत्रित रहता है तो छह से आठ महीने बाद जांच करानी होगी। धीरे-धीरे दवा कम करते हुए डॉक्टर तय करते हैं कि आपको कितनी दवा कीजरूरत है। इसके अलावा नियमित व्यायाम करें। पौष्टिक भोजन करें।