
गो आधारित व प्राकृतिक खेती से ले रहे दोगुना मुनाफा, रिपोर्ट योगेश मुदगल
एटा – एक तरफ जिले के 90 फीसदी किसान रासायनिक खादों का उपयोग कर फसलों एवं मिट्टी की गुणवत्ता खराब कर रहे हैं।
दूसरी तरफ गो आधारीय एवं प्राकृतिक खेती करने वाले किसान बेहद कम लागात में अच्छा मुनाफा कमाने के साथ मिट्टी उर्वरा शक्ति बढ़ाकर उत्पादन भी काफी अच्छा प्राप्त कर रहे हैं।
जिला कृषि अधिकारी डा.मनवीर सिंह ने बताया कि सभी प्रकार के फसलीय सीजनों के दौरान जिले के अधिकांश किसान डीएपी, यूरिया एवं एनपीके आदि रासायनिक खादों के लिए खाद केंद्रों पर परेशान रहते हैं। उसके बाद भी उनका फसल उत्पादन मंडियों में सामान्य रेटो पर ही बिकता है।
इससे फसलों की लागात भी नहीं निकल पाती है। अगर किसान गो आधारीय एवं प्राकृतिक फसल पद्धति को अपनाते हैं तो उनको भी फर्टिलाइजर एवं प्रेस्टीसाइड पर फिजूल खर्च करने की जरुरत नहीं पड़ेगी।
प्राकृतिक अनाज की खेती के साथ बनाते बीज शीतलपुर ब्लॉक के गांव वाहनपुर निवासी किसान फूल सिंह आर्य वर्षों से रासायनिक खादों के मोहताज नहीं हैं। वह पशुपालन कर उनके ही मलमूत्र से खरीफ एवं रबी के अलावा दलहन एवं तिलहन की फसलें करते हैं। उसके साथ ही वह बीज भी बनाते हैं।
इसका उपयोग वह करते हैं व अन्य किसानों को भी देते हैं। फूल सिंह के अनुसार प्राकृतिक खेती करना तभी संभव है जब पशुपालन किया जाए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में गेहूं के साथ जौ की फसल कर रहे हैं।